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गर्द-ओ-गुबार बना रहा बीमार

Thu, 17 Mar 2016 02:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी
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हाल बदहाल
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सुगम यातायात की राह में रोड़ा बनीं शहर की खस्ताहाल सड़कें बनारसियों को बीमार बना रही हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों में लगातार बढ़ रही मरीजों की संख्या तो यही बता रही है। धूल से फे फड़े खराब हो रहे हैं तो वाहनों के शोरगुल के बीच जाम में घंटों फंसने से लोग मानसिक तनाव से ग्रस्त हो रहे हैं। खस्ताहाल सड़कों पर वाहन दौड़ाने वाले आम शहरी तेजी से सर्वाइकल स्पाॅंडलाइटिस जैसे रोग के शिकार हो रहे हैं। डॉक्टर भी मान रहे हैं कि धूल, धूआं और खराब सड़कें शहरियों के स्वास्थ्य पर असर डाल रही हैं। बाइक, स्कूटर या ऑटो से चलने वालों में यह समस्या अधिक है।
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बीएचयू के सर सुंदर लाल अस्पताल के हड्डी रोग विभाग के डॉ. अमित रस्तोगी बताते हैं, प्रतिदिन ओपीडी में 300 मरीज आते हैं। इनमें से 90 से सौ मरीज कमर, गर्दन और पीठ में दर्द की शिकायत लेकर आते हैं। इनमें से अधिकतर दो पहिया या तीन पहिया वाहन से चलने वाले होते हैं। उधर, शिवप्रसाद गुप्त मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा और दीनदयाल उपाध्याय राजकीय अस्पताल में चेस्ट फीजिशियन की ओपीडी में हर दिन अस्थमा से पीड़ित पांच से दस मरीज पहुंचते हैं। मंडलीय अस्पताल के चेस्ट फीजिशियन डॉ. एससी मौर्या ने बताया कि ओपीडी में आने वाले करीब 70 मरीज में औसतन चार से पांच नए मरीज अस्थमा से पीड़ित मिलते हैं।

सड़कों पर उड़ रही धूल की वजह से उनकी सेहत खराब हो रही है। जरूरी दवाइयां देने के साथ ही उन्हें इससे बचाव के लिए मॉस्क लगाकर बाहर निकलने की सलाह दी जाती है। बताया कि ऐसा न करने से जगह-जगह सड़कों की खुदाई की वजह से धूल के कण अंदर जाने का डर बना रहता है।
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