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दशहरा 2026: 56 साल में पहली बार बरेका में 10 की जगह एक सिर वाले रावण के पुतले का होगा दहन, वजह जान लें

Tue, 15 Sep 2026 03:21 PM IST
Pragati Chand प्रेमन कुमार मौर्य, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी।

सार

बरेका में 56 साल में पहली बार 10 की जगह एक सिर वाले रावण के पुतले का दहन होगा। पुतला बनाने में कारीगर जुटे हैं। वहीं पुतले को बारिश से बचाने के लिए सिल्क के कपड़े बनवाए गए हैं। इस बार कुंभकर्ण का पुतला 65 फीट और मेघनाद का 60 फीट ऊंचा होगा। 
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पुतला बनाता कारीगर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेका के दशहरा समारोह में इस बार रावण के पुतले का स्वरूप बदला रहेगा। 56 साल में पहली बार ऐसा होगा कि 10 की जगह एक सिर वाले रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। 70 फीट ऊंचे रावण के पुतले में अकेले सिर 20 फीट का होगा। इसी तरह 65 फीट के कुंभकर्ण और 60 फीट के मेघनाद के पुतले तैयार किए जा रहे हैं। दशहरे पर करीब ढाई घंटे कार्यक्रम चलेगा फिर पुतलों का दहन किया जाएगा।

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बरेका में 1970 से ही दशानन के पुतले का दहन किया जाता है। हर साल 10 सिर वाले रावण का पुतला बनाया जाता था, लेकिन इस बार एक सिर वाले रावण का पुतला तैयार किया जा रहा है। कारीगरों के अनुसार, दशानन के पुतले को खड़ा करने में परेशानी होती थी। 

बारिश से पुतले खराब हो जाते थे इसलिए पुतलों की बनावट और उनके परिधान में बदलाव किया गया। इस बार करीब 350 मीटर सिल्क के कपड़े से तीनों पुतलों के परिधान तैयार किए जा रहे हैं ताकि बारिश में पुतले खराब न हो सकें। पुतलों को दशहरे से तीन दिन पहले ही खड़ा किया जाएगा।  
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100 किलो तांत और 500 किलो गत्ते का इस्तेमाल
रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के निर्माण में करीब 150 पीस बांस, 25 लीटर पेंट, 100 किलो तांत और 500 किलो गत्ते का इस्तेमाल किया जा रहा है। 10 कारीगर दिन-रात काम कर रहे हैं ताकि समय से पुतले बनाए जा सके।

पांच दृश्यावलियों के जरिये परखी तैयारी
बरेका संस्थान के हॉल में रूपक की तैयारियां परखी गईं। रिहर्सल हुआ। रूपक निदेशक एसडी सिंह की देखरेख में पांच दृश्यावलियों के जरिये राम वनगमन से रावण वध, पुतला दहन तक के प्रसंगों का मंचन किया गया। संवादों के साथ गीतों को भी रूपक का हिस्सा बनाया गया है।
 

करीब ढाई घंटे चलने वाले रूपक के बाद रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा। बरेका और आसपास के क्षेत्रों के अलावा दूसरे जनपदों से भी बड़ी संख्या में लोग आते हैं। -एसडी सिंह, निदेशक, रूपक
नयापन लाने के उद्देश्य से इस बार एक सिर वाले रावण के पुतला का निर्माण किया जा रहा है। -अनूप सिंह वत्स, महामंत्री, विजया दशमी समिति

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20 अक्तूबर को शाम साढ़े सात बजे होगा रावण-कुंभकर्ण-मेघनाद पुतलों का दहन
18 अक्तूबर को केंद्रीय खेल मैदान में फुल ग्राउंड रिहर्सल किया जाएगा। 20 अक्तूबर को दशहरा मनाया जाएगा। शाम चार बजे रूपक के कलाकार मैदान में पहुंचेंगे। शाम साढ़े चार बजे रूपक शुरू होगा। करीब ढाई घंटे तक चलने वाले मंचन के बाद रात साढ़े सात बजे रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा।
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