वाराणसी। शारदीय नवरात्र के छठवें दिन भक्तों ने देवी का दर्शन पूजन किया। योग साधकों ने माता की साधना कर अभीष्ट की सिद्धि की कामना की। संकठा मंदिर के निकट स्थित मंदिर में कात्यायनी देवी के दर्शन पूजन के लिए शुक्रवार को भक्तों की लंबी कतार लगी रही। देवी के कात्यायनी स्वरूप का दर्शन पूजन कर भक्तों ने मां से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष का वर मांगा।
शुक्रवार को बांसफाटक स्थित देवी कात्यायनी के दरबार में मंगला आरती के बाद भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। भोर में माता को पंचामृत स्नान कराने के बाद माता का विधिवत शृंगार किया गया। इसके उपरांत भक्तों के दर्शन के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए गए। भक्तों ने रोग, शोक, संताप और भय के नाश के लिए माता के दरबार में हाजिरी लगाई। मान्यता है कि माता के दर्शन से जन्मों के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। कात्य गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन ने भगवती परांबा की उपासना की थी। तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया। इसलिए वह देवी कात्यायनी कहलाईं। इनका गुण शोधकार्य है। इनकी कृपा से सारे कार्य पूरे हो जाते हैं।