ऐसे मिला शिवलिंग
गांव के बांसदेव मौर्य और राजापुर के श्यामनारायण समेत कई ग्रामीणों ने शिव मंदिर के निर्माण के बारे में बताया कि पहले यहां काफी दूर तक घने जंगल थे। अलग-अलग वजहों से यहां आने वाले लोग मार्ग भटक गए और यहीं बस गए। भूख लगी तो फल-फूल खाकर गुजारा कर लिया। लेकिन पीने के लिए पानी का इंतजाम नहीं था। इसके लिए लोग कुआं खोदने लगे। करीब छह फीट की खुदाई के बाद यहां शिवलिंग दिखा। इसके बाद लोगों ने खुदाई बंद कर यहां मंदिर निर्माण कर पूजा-पाठ करना शुरू कर दिया।
एक ओर शिवलिंग, पर नहीं हैं नंदी
सोमवार को बीएचयू की पुरातत्व विभाग की टीम खुदाई में जुटी रही। ग्रामीणों में भूगर्भ से निकल रहे अवेशष को देखने और समझने का कौतूहल साफ दिख रहा है। आसपास के गांवों से आए ग्रामीणों ने बताया कि आज भी किसी निर्माण के लिए खुदाई या खेती करते हैं तो शिवलिंग व पुरातात्विक अवशेष मिलते रहते हैं। इस मंदिर से करीब 100 मीटर की दूरी पर एक और शिव मंदिर है।