करबला में शहीद हुए इमाम हुसैन और उनके साथियों की याद में छठवीं मोहर्रम पर मंगलवार को कच्चीसराय से दुलदुल का ऐतिहासिक जुलूस उठाया गया। विश्व प्रसिद्ध दुलदुल का जुलूस जब देर शाम उठाया गया तो इसकी शान देखते बनी। ढोल, बाजे और ताशे के साथ निकले इस जुलूस में पीछे जहां हाथी और ऊंट का काफिला था, तो वहीं फूलों से सजे दुलदुल की जियारत को अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ पड़ा।
मन्नते मांगने के लिए ख्वातीन रास्ते भर मौजूद रहीं। इस दौरान ...या हुसैन ...या हुसैन के नारे तो बुलंद होते ही रहे, नौहों के बोल और मातम से लोग अश्कबार होते रहे।
अंजुमन जव्वादिया की ओर से मंगलवार को कच्चीसराय दालमंडी स्थित सिताब राय इमामबाड़े से मुतवल्ली सैयद इकबाल हुसैन और लाडले हसन की देखरेख में चालीस घंटे का जुलूस उठाया गया।
जुलूस में शामिल सैकड़ों अकीदतमंदों ने दुलदुल की जियारत की। शहनाई की धुन पर नौहों के बोल सुन जहां लोग जारोकतार रो पड़े थे, वहीं अंजुमन जव्वादिया के सदस्यों द्वारा सीनाजनी और मातम देखकर भी लोगों की आंखें छलक उठीं। कच्चीसराय से ये जुलूस नई सड़क, काली महल, माताकुंड, पितरकुंडा होते हुए देर रात फातमान पहुंचा।
जुलूस के दौरान कई घरों में दुलदुल को जियारत के लिए ले जाया गया जहां ख्वातीन ने दुलदुल को दूध और शिरनी खिलाकर मन्नतें मांगी। बता दें कि फातमान दरगाह से ये जुलूस उठकर पितरकुंडा, चेतगंज, औसानगंज, जैतपुरा, दोषीपुरा, दारानगर, बहेलिया टोला, पठानी टोला, हनुमान फाटक, लाट भैरव, चौहट्टा लाल खां, गायघाट, ठठेरी बाजार, चौक दालमंडी होते हुए गुरुवार की सुबह कच्चीसराय स्थित इमामबाड़े पर आकर खत्म होगा।