ओएसटी सेंटर के परामर्शदाता प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि अच्छे घरों के लोग भी इस नशे की गिरफ्त में हैं। जिले में कई क्षेत्र ऐसे भी हैं, जो नशे का हॉट स्पॉट हो चुके हैं। उन क्षेत्रों से भी लोग यहां आते हैं, उनकी पहले काउंसिलिंग करके उन्हें दवाएं दी जाती हैं। इन दवाओं का सामान्य तौर पर दो वर्षों का डोज है लेकिन मरीज जब तक स्वयं दवाओं को छोड़ नहीं देता, तब तक दवाएं चलती रहती हैं। इन दवाओं का 24 से 36 घंटे तक असर रहता है।