संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति के विरोध में बीएचयू के प्रोफेसर लामबंद हो गए हैं। छह पूर्व संकाय प्रमुखों समेत 50 से अधिक प्रोफेसर (वर्तमान में एमेरिटस, डिस्टिग्विंस प्रोफेसर और शिक्षक भी शामिल) ने विश्वविद्यालय के विजिटर (राष्ट्रपति) और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर नियुक्ति को विधि विरुद्ध करार दिया है। उन्होंने तर्क दिया है कि बीएचयू में इस संकाय के अलावा संस्कृत भाषा के लिए अलग संकाय हैं। मगर, धर्म विज्ञान संकाय में गैर हिंदू की नियुक्ति ठीक नहीं है।
डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति के थम रहे विरोध के बीच बीएचयू के 50 से ज्यादा प्रोफेसर के हस्ताक्षर वाले पत्र ने एक बार फिर इस विवाद को हवा दे दी है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लिखे तीन पेज के पत्र में इन शिक्षकों ने बताया है कि एसवीडीवी की स्थापना विश्वविद्यालय के स्थापना काल 1915 से संसद द्वारा पारित अधिनियम से संचालित है।
इसके धार्मिक अध्ययन का प्रावधान बीएचयू एक्ट 1915 और संसद द्वारा संशोधित अधिनियम 1951 द्वारा आज तक संरक्षित और मूल भावना के अनुरूप चला आ रहा है। ऐसे में बीएचयू के सभी अधिनियमों के साथ ही संसद द्वारा मान्य मौलिक स्वरूप सहित एसवीडीवी की परंपरा के साथ किसी भी स्तर पर छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। प्रोफेसरों ने इसके लिए पूर्व में पारित अधिनियमों का हवाला देते हुए नियुक्ति को रद्द करने की मांग की है। यहां बता दें कि एसवीडीवी में डॉ. फिरोज की नियुक्ति के विरोध में छात्रों ने 16 दिन (7 से 22 नवंबर) तक धरना दिया था।
कई चरणों की बातचीत के बाद किसी तरह बीएचयू प्रशासन ने 22 नवंबर को धरना समाप्त करा दिया था। मगर, पूर्व में संकाय प्रमुख, कार्यकारिणी सदस्य सहित अन्य पदों पर कार्य कर चुके प्रोफेसर के विरोध से फिर माहौल गरमा गया है।
पत्र में यह है खास
बीएचयू के प्रोफसरों के पत्र में एसवीडीवी में गैर हिंदू शिक्षक की नियुक्ति को विधि विरुद्ध बताया गया है। राष्ट्रपति को भेजे पत्र में कहा है एसवीडीवी के साहित्य विभाग के शिक्षक के रूप फिरोज खान की नियुक्ति गलत है। इसे तत्काल रद्द किया जाए। साथ ही कला संकाय, आयुर्वेद संकाय, संगीत एवं मंच कला संकाय, महिला महाविद्यालय, वैदिक विज्ञान केंद्र, भारत अध्ययन केंद्र में संस्कृत विभाग होने और अन्य महाविद्यालयों का हवाला देते हुए यहां किसी भी मत-पंथ वालों की नियुक्ति की जानकारी दी है।