सिर पर मैला ढोने से मुक्ति पाने वाली महिलाओं को लेकर गंगा स्नान और बाबा विश्वनाथ का दर्शन कराने रविवार को काशी पहुंचे सुलभ इंटरनेशनल के प्रमुख अछूतोद्धार आंदोलन के अगुवा डॉ. बिंदेश्वर पाठक पुलिस की रोकटोक के चलते मंदिर के प्रवेश द्वार से ही लौट गए। गंगा स्नान के बाद आठ दलित महिलाओं को लेकर वह पहुंचे थे। पता चला है कि मंदिर के प्रोटोकॉल में नाम दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने उन्हें आम भक्तों की कतार में लगकर आने के लिए विवश करने लगी। इससे नाराज होकर सुलभ इंटरनेशनल ने मंदिर परिसर की सफाई के लिए तैनात अपने सेवादारों को वापस बुला लिया है। अपनी सेवाओं के चलते बिंदेश्वर पद्मभूषण सम्मान से नवाजे जा चुके हैं।
अलवर और गाजियाबाद में सिर पर मैला ढोने के काम से मुक्त कराई गईं आठ दलित महिलाओं को लेकर काशी पहुंचे बिंदेश्वर पाठक ने सुबह दशाश्वमेध घाट पर गंगा स्नान किया। इसके बाद सरस्वती फाटक से वह विश्वनाथ मंदिर जाने के लिए पहुंचे। वहां तैनात सुरक्षा कर्मियों ने यह कहकर उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया कि इस द्वार से इंट्री बंद है। इसके बाद वह छत्ताद्वार पर पहुंचे। वहां से भी उन्हें लाइन में लगा दिया गया। जब यह बताया गया कि उनके लिए मंदिर प्रशासन के पास पहले से प्रोटोकॉल है, तब भी पुलिसकर्मियों ने नहीं सुनी। इसके बाद उन्होंने ढुंढिराज प्वाइंट से भी मंदिर में प्रवेश की कोशिश की लेकिन पुलिस ने वहां भी चेकिंग के बहाने रोक दिया।
इसके बाद वह बिना दर्शन के लिए चले गए। हालांकि, उनके साथ आईं महिलाओं को बाद में दर्शन कराया गया। अवकाश पर गए सीईओ अजय कुमार अवस्थी को जब इसकी जानकारी मिली तब उन्होंने फोन पर बिंदेश्वर पाठक से आग्रह किया कि गलतफहमी में ऐसा हुआ है, वह बाबा के दरबार में मत्था टेक लें लेकिन उन्होंने निजी कारणों से दोबारा मंदिर जाने से इनकार कर दिया। इस घटना के बाद मंदिर में सुलभ की ओर से सफाई के लिए तैनात 12 सेवादारों को भी वापस कर लिया गया। सुलभ इंटरनेशल प्रबंधन ने बताया कि इस घटना से सुलभ परिवार के लोग मर्माहत हैं।