पीएचडी करते समय हुआ था बड़ा हादसा
नवानगर। डॉ. अनिल कुमार मिश्रा पांच भाई और एक बहन थे। बीएचयू से पीएचडी के दौरान उनके परिवार में बड़ा हादसा हुआ, जिसमें उनके पिता विजय शंकर मिश्रा और चौथे नंबर के अनुज अजय कुमार मिश्रा की करंट लगने से मौत हो गई। इस घटना से डॉ मिश्रा की काफी सदमे में रहे। बावजूद इसके उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की, जिसकी बदौलत आज पूरा देश उन पर गर्व कर रहा है। उनकी माता सुशीला मिश्रा ने बताया कि वह कहीं रहे फोन से हमेशा बात करता है। विदेश में रहने के दौरान भी मेरा हालचाल लेते रहता था। गांव में दो-तीन लोगों के पास ही उनका नंबर है। अपने मित्रों को उन्होंने बता रखा है कि रिसर्च के दौरान उन्हें परेशान न करें। डॉक्टर मिश्रा की माता उनके छोटे अनुज सुधीर कुमार मिश्रा (अध्यापक) के साथ सिकंदरपुर जूनियर हाई स्कूल के पास बने नए मकान में रहती हैं।
सहज व्यक्तित्व के धनी हैं डॉ एके मिश्रा
नवानगर। गांव के कन्हैया खरवार बताते है कि डाक्टर साहब बहुत ही सरल स्वभाव के है, वह जब भी गांव आते हैं तो सभी लोगों से सहजता से मिलते-जुलते है। प्रसिद्ध नारायण मिश्रा ने बताया कि डॉक्टर साहब कई सालों पर गांव आते हैं, लेकिन जब भी आते है तो उनसे मिलने वालों का तांता लगा रहता है। गांव के ही भुसुंडी पांडे बताते है कि इतनी उपलब्धि हासिल करने के बावजूद डाक्टर साहब अपनी मातृ भाषा भोजपुरी को नहीं भूलें है। गांव में अपने मित्रों से वह भोजपुरी में ही बात करते हैं। गांव ही नहीं आसपास के क्षेत्र के लोग भी उनका बहुत सम्मान करते हैं।
बधाई देने वालों का लगा तांता
डॉ. अनिल मिश्रा द्वारा कोरोना के इलाज में गेम चेंजर दवा टू डीजी बनाने की खबर मिलने के बाद लोगों द्वारा उनके भाइयों को फोन कर और उनके दरवाजे पर जाकर बधाई देने का तांता लग गया। उनके भाइयों से मिल कर लोग उनके माध्यम से डॉक्टर साहब को बधाई देने की बात कहते नजर आए।
पिता विजय शंकर थे अध्यापक
नवानगर। डा. अनिल कुमार मिश्रा के पिता स्व. विजय शंकर मिश्रा अध्यापक थे। डा. मिश्रा पांच भाई और एक बहन में से दूसरे नंबर के हैं। बड़े भाई अशोक मिश्रा, संदवापुर इंटर कॉलेज में प्रवक्ता हैं। तीसरे भाई अरुण कुमार मिश्रा गांव पर ही खेती कराते हैं। चौथे भाई स्व. अजय कुमार मिश्रा, पांचवे भाई सुधीर कुमार मिश्रा, जूनियर हाईस्कूल सिकंदरपुर में अध्यापक पद पर कार्यरत हैं। सबसे छोटी बहन बीना द्विवेदी की शादी हो चुकी है।
अंतिम बार वर्ष 2018 में आए थे गांव
डॉ एके मिश्रा अक्सर बाहर ही रहते है। वर्ष 2018 के सात मई को अपने चचरे पौत्र असित कुमार मिश्रा के वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल होने गांव आए थे। तब वह एक सप्ताह तक गांव रहे और अपने बचपन के दोस्तों के अलावा शुभचिंतकों से भी मुलाकात की थी। उसके बाद वह गांव नहीं आए। हालांकि उनके द्वारा कोरोना के इलाज के लिए दवा बनाने की खबर जरूर आई, जिसने उनके मित्रों और शुभचिंतकों को प्रफुल्लित कर दिया।