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दूरदर्शन दिखाएगा मऊ के दो परिवारों के ‘अच्छे दिन’ की कहानी

Fri, 26 May 2017 02:11 PM IST
विनोद कुमार सिंह,अमर उजाला,मऊ
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दूरदर्शन - फोटो : demo
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इसी साल 11 फरवरी को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में हल किए गए मऊ में पारिवारिक वाद के दो मामलों को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण ने सराहा है। अब राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने इन दोनों निस्तारित मामलों पर वृत्त चित्र बनाने के लिए केस हिस्ट्री मांगी है।
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राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ज्योत्सना शर्मा ने मऊ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को इस आशय का पत्र भेजा है। इस क्रम पारिवारिक न्यायालय के जज नीरज निगम ने दोनों मामलों की कहानी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को उपलब्ध करा दी है।

11 फरवरी को जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में लगी राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह-समझौते के आधार पर वादों का निस्तारण किया गया था। चार निस्तारित मामलों की सूची राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली को भेजी गई थी।
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जिले में निस्तारित दो मामलों को देश भर में प्रथम और द्वितीय स्थान मिला था। इस मामले में लीगल सेल ने निर्णय लिया कि समाज में फैली विकृतियां दूर करने के लिए दोनों मामलों में वृत्त चित्र बनाकर उसे दूरदर्शन पर दिखाया जाएगा। 
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पढ़िए दोनों परिवारों के अनोखे मामले

कोर्ट - फोटो : Pintrest

 केस एक     
कोतवाली घोसी क्षेत्र की पूजा गिरी (32) ने अपने आरक्षी पति विवेकानंद गिरी के खिलाफ कोर्ट में भरण पोषण का वाद 2014 में दाखिल किया। पूजा का आरोप था कि उसकी शादी 2007 में हुई थी। इस दौरान एक बच्चा हर्ष पैदा हुआ। दो लाख रुपये की मांगकर उसका पति उसे सात जुलाई, 2013 को मार-पीट कर घर से निकाल दिया। न्यायाधीश के समझाने पर विपक्षी ने गलती स्वीकार कर गल्तियों की पुनरावृत्ति न करने का वचन दिया। साथ ही दोनों एक साथ रहने को राजी हो गए।

केस दो     
मुहम्मदाबाद गोहना कोतवाली क्षेत्र के तुफैल अहमद (35) ने अपनी पत्नी शबनम की विदाई के लिए तो शबनम ने भरण पोषण के लिए 2016 में परिवार न्यायालय में वाद दाखिल किया। दोनों की शादी जनवरी, 2005 में हुई थी। तीन बच्चे क्रमश: तलउत, निकहत और तौसीफ पैदा हुए। तुफैल सऊदी अरब कमाने गया था। वहाँ से एक लाख चालीस हजार रुपया बच्चों के दवा व इलाज के लिए भेजा था। वादी का कथन था कि शबनम सामान और 30 हजार रुपया लेकर अपने मायके चली गई। विदेश से लौटकर तुफैल पत्नी को लेने गया तो उसने आने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने दोनों बच्चों के भविष्य पर ध्यान देने और पृथक रुप से जीवन व्यतीत करने पर होने वाली समस्याओं का हवाला देकर उन्हें समझाया। इस पर दोनों फिर से एक हो गए।
 
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