कार्यशाला में मौजूद दंत चिकित्सक।
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बीएचयू के दंत चिकित्सा विज्ञान संकाय में चल रही कार्यशाला के तीसरे दिन दांतों से जुड़ी बीमारियों के कारण, उसके इलाज की विधियों पर दंत चिकित्सकों ने मंथन किया। इसमें नई तकनीक से दंत प्रत्यारोपण, जबड़े की हड्डिया कमजोर होने के बाद इलाज आदि के बारे में प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया गया।
बीएचयू दंत चिकित्सा विज्ञान संकाय के प्रो. राजेश बंसल का कहना है कि बढ़ती उम्र के साथ ही महिलाओं में दांतों से जुड़ी बीमारियां बढ़ने लगती है। आमतौर पर 45 साल से अधिक उम्र के बाद महिलाओं में मासिक धर्म बंद हो जाता है, इसे चिकित्सकीय भाषा में (पोस्टमेनोपॉज़ल) कहते हैं।
डॉ. अमित शर्मा ने यह बताया कि प्रत्यारोपण का सहारा लेकर फिक्स दांत उन रोगियों को कैसे दिए जा सकते हैं जिनकी हड्डी गंभीर रूप से घिस गई है।
दो दिन में तीन सर्जरी, 11 इंप्लांट लगे
प्रोफेसर राजेश बंसल का कहना है कि कार्यशाला में अब तक तीन मरीजों की सर्जरी के साथ ही कुल 11 इंप्लांट लगाए गए हैं। कार्यशाला में प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि एडेंटुलिज्म एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या है। इसमें जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, दांतों की संख्या कम हो जाती है, दंत क्षरण भी होता है।
नई तकनीक से प्रत्यारोपण के साथ एक निकला हुए दांत का प्रतिस्थापन कर इसको दूर किया जाता है। इसमें जबड़े की हड्डी में पतला पेच डाला जाता है और इम्प्लांट के ऊपर क्राउन जुड़ा होता है। यह प्राकृतिक दांत की तरह काम करता है। यह अपेक्षाकृत नया उपकरण है और पुराने ब्रिज आंशिक डेंचर की तुलना में बहुत बेहतर भी है।