जाम छलकाना तो बेहद अच्छा लगता है। शुरुआत में तो यह शौक रहता है, पर शौक से नशा और फिर जिंदगी के लिए खतरा कैसे ये शराब बन जाती है। जब तक पता चलता है, तब तक देर हो जाती है, लेकिन इन सबके बीच जो सबसे बड़ी लापरवाही होती है, वो है जब शराब किसी इंसान को खत्म करने लगती है, तबीयत खराब होती है और इसके संकेत बीमारी के रूप में मिलते हैं।
डॉक्टर चेतावनी भी देते हैं, लेकिन इंसानी गुरूर में हम उस चेतावनी को भी नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसा ही कुछ वाराणसी के बड़ौरा बाजार निवासी मिष्ठान विक्रेता दिलीप जायसवाल (55) ने किया। दिलीप की उपचार के दौरान मंगलवार को वाराणसी स्थित एक निजी अस्पताल में मौत हो गई।