फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

छुट्टा पशु नहीं, ढूंढते हैं ‘दुधारू’

Sat, 25 Mar 2017 02:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
गौशाला - फोटो : self
विज्ञापन
शहर में घुमंतू पशुओं को ढूंढने की जरूरत नहीं, किसी भी गली, सड़क या चौराहे से गुजरिए वहां इनका झुंड आपको दिख जाएगा। इनके जमावड़े से अक्सर यातायात में अवरोध और जाम की समस्या बनी रहती है लेकिन इनकी धरपकड़ के लिए बनाए गए नगर निगम के सचल पशु दस्ते को ये नजर नहीं आते। अलबत्ता, दुधारू पशुओं पर उनकी खास नजर होती है। ऐसा हम नहीं कह रहे, बल्कि खुद नगर निगम के आंकड़े बता रहे हैं। अक्तूबर से दिसंबर तक दस्ते की ओर से पकड़े गए 208 पशुओं में 193 गाय-बछड़े थे।  
विज्ञापन
 
छुट्टा पशुओं की धरपकड़ के नाम पर महज दिखावा होने का दावा करने वाले इसके पीछे वसूली का खेल होने का आरोप लगाते हैं। उनकी मानें तो निजी पशुपालकों के गाय-बछड़े ले जाकर दस्ते के लोग उन्हें छोड़ने के एवज में मनमाना रकम वसूलते हैं। तबले वालों के विरोध से बचने के लिए सड़कों पर जमावड़े के बावजूद भैंस नहीं पकड़ते। सड़कों पर कुत्ते सबसे अधिक दिखेंगे लेेकिन दस्ते ने तीन महीने में एक भी नहीं पकडे़।     नई सड़क, गिरजाघर, गोदौलिया, चितरंजन पार्क, दशाश्वमेध घाट, अंधरापुल, चौक, मैदागिन पर छुट्टा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। आरपी घाट, शीतला घाट, अस्सीघाट, मानमंदिर, दशाश्वमेध, शीतला घाट, सिंधिया घाट समेत सभी घाटों पर हालात ऐसे ही होते हैं लेकिन इनकी धरपकड़ के लिए वास्तविक रूप से अभियान तभी चलता है जब किसी वीवीआईपी का आगमन होना होता है। छुट्टा पशुओं को पकड़ने और उन्हें रखने की समुचित व्यवस्था भी नगर निगम के पास नहीं है। अर्दली बाजार और नक्खीघाट में बने कांजीहाउसों की क्षमता करीब 30-30 पशुओं के रखने की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें