प्राचीन डीएनए प्रयोगशाला हेड डॉ. नीरज राय का कहना है कि पहली बार इस शोध ने बताया कि सिंहली आबादी विशेष रूप से पश्चिम भारत की मराठा आबादी से जुड़ी हुई है और यह आनुवांशिक विरासत अब भी अपने डीएनए में सहेजे हुए हैं। प्रसिद्ध भाषाविद प्रो. जॉर्ज वैन ड्रिम के मुताबिक दक्षिण एशियाई आबादी के व्यापक संदर्भ में, श्रीलंकाई जातीय समूह किसी भी अन्य जाति या जनजाति समूहों की तुलना में आनुवंशिक रूप से अधिक समान हैं।
प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने कहा कि यह अध्ययन न केवल सिंहली लोगों के आनुवांशिक इतिहास पर प्रकाश डालता है, बल्कि श्रीलंका की विविध आबादी का भारत से प्रवास और उनकी जेनेटिक मिक्सिंग को भी तथ्यात्मक रूप से बताता है। बीएचयू के विज्ञान संकाय के निदेशक प्रो. अनिल के त्रिपाठी ने कहा कि दक्षिण एशियाई आबादी की आनुवांशिक विरासत को समझने में बीएचयू लगातार प्रयासरत है।