दीपावली पूजन का सर्वोत्तम मुहूर्त स्थिर लग्न वृष में दोपहर 2:13 बजे से 3:44 बजे तक मिल रहा है। सर्वोत्तम प्रदोष काल स्थिर लग्न वृष में शाम को 6:51 बजे से 8:48 बजे तक रहेगा। महानिशा पूजन स्थिर लग्न सिंह में रात्रि 1:19 से 3:33 बजे तक होगा। भोर में 21 अक्तूबर को दरिद्रा देवी को घर से बाहर निकालने की रस्म निभाई जाएगी।
22 अक्तूबर को गोवर्धन पूजन और देवमंदिरों में अन्नकूट होगा। 23 अक्तूबर को भैया दूज और चित्रगुप्त पूजन से पंच दीपोत्सव का समापन होगा। पं. दीपक मालवीय ने बताया कि अमावस्या 20 अक्तूबर को दिन में 2:32 बजे से लगेगी और अगले दिन 21 अक्तूबर की शाम 4:26 बजे तक रहेगी। इसलिए 20 अक्तूबर को दीपावली का महापर्व मनाया जाएगा।
त्रयोदशी से द्वितीया तक होंगे आयोजन : पंच दीपोत्सव में धनतेरस, नरक चतुर्दशी (छोटी दीपावली), दीपावली (लक्ष्मी पूजा), गोवर्धन पूजा और भाई दूज शामिल हैं। यह पर्व कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि तक मनाया जाएगा।