डॉ. राय ने विश्वविद्यालय के परिकल्पना से लेकर विश्वविद्यालय के निर्माण और विकास पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय के विभिन्न कालखंडों, परंपरा, त्योहार, सांस्कृतिक आयोजन, प्रतियोगिताओं, विरासत और विश्वविद्यालय के अवसंरचना का विस्तारपूर्वक विश्लेषण किया।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों तथा विद्यार्थियों का औपचारिक तौर पर धन्यवाद ज्ञापन करते हुए छात्र सलाहकार डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह ने नवप्रवेशियों से कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री हासिल करने की जगह नहीं होता है, यह आपके व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास की जगह है।
इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत महामना मालवीय की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित कर, दीप प्रज्जवलन, मंगलाचरण, मंगल पाठ और कुलगीत से हुआ। छात्रा स्वर्णिमा त्रिपाठी ने कथक के माध्यम से शिव स्तुती प्रस्तुक की।
पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. डीके सिंह ने पुस्तकालय के सुविधाओं, संसाधनों और पद्धति से विद्यार्थियों को अवगत कराया। वहीं, विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद के अध्यक्ष प्रो. बीसी कापड़ी ने खेल सुविधाओं के बारे में विस्तृत परिचय दिया। छात्र नगर निकाय के आचार्य प्रभारी डॉ. ललित मोहन अग्रवाल ने विद्यार्थियों को छात्र नगर निकाय की सुविधाओं, वहां होने वाली प्रतियोगिताओं के बारे में बताया।
दीक्षारंभ में माैजूद लोग।
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शारीरिक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष और एनसीसी अधिकारी प्रो. (कैप्टन) विक्रम सिंह ने एनसीसी के महत्व पर चर्चा की। विद्यार्थियों को एनसीसी में शामिल होने की प्रक्रिया और गतिविधियों में भागीदारी के बारे में मार्गदर्शन दिया। छात्रावास समन्वयक प्रो. डीके ओझा ने विश्वविद्यालय के छात्रावासों की सुविधाओं और आवास प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसआर सिंह ने विद्यार्थियों को स्वास्थ्य, फिटनेस और दैनिक जीवनशैली पर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने स्वच्छता और स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित करते हुए सक्रिय और सकारात्मक रहने की आवश्यकता पर बल दिया।
दीक्षारंभ के तीसरे सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रमों को आयोजन किया गया। जिसमें नृत्य और गायन के विभिन्न विधाओं की प्रस्तुती विद्यार्थियों ने किया। कार्यक्रम के तीनों ही सत्रों का संचालन वंश, अद्यांशु, कार्तिकेय, रीतु, झुनका, कशिश, ओम, शुभांगी, हिमांशु, दामिनी, श्रेया और सत्यम ने किया।