राजस्थान के संस्कृत विद्वान डॉ. कौशल शर्मा ने भी अनेक प्रमाणों के साथ 20 अक्तूबर के निर्णय का समर्थन किया। दिल्ली के पुजारी संघ के अध्यक्ष आचार्य गिरधारी लाल ने भी इसी तिथि पर मुहर लगाई। डॉ. मंजू जोशी ने कहा कि 21 अक्तूबर को प्रदोषकाल में तीन मुहूर्त अमावस्या तिथि पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए दीपावली 20 अक्तूबर को ही मनाई जानी चाहिए।
सुप्रसिद्ध कथा वाचक डॉ. मनोज पांडेय ने भी एक राष्ट्र, एक धर्म, एक पर्व की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए 20 अक्तूबर की तिथि का समर्थन किया। सभा में उपस्थित सभी विद्वानों, संस्थाओं एवं पंचांगकारों की सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि सनातन धर्म की एकरूपता और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक रूप में इस वर्ष दीपावली महोत्सव 20 अक्तूबर को ही संपूर्ण भारतवर्ष में मनाया जाएगा।