मिर्जापुर जिले की पूर्व डीएम दिव्या मित्तल ने मंगलवार को चिर परिचित अंदाज में ही राजनीति में उतरने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि मां विंध्यवासिनी का आशीर्वाद है। मिर्जापुर राजनीति का बड़ा केंद्र रहेगा।
राजनीति में आने के एलान के साथ ही दिव्या मित्तल ने हमारे संवाददाता से बात की। उन्होंने कहा कि मां विंध्यवासिनी की कृपा और आत्मा की पुकार की वजह से राजनीति में कदम रखने जा रही हैं।
विधानसभा या लोकसभा चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसके लिए थोड़ा इंतजार करिए। जल्द ही जानकारी मिल जाएगी। जो भी काम करूंगी पूरी जिम्मेदारी और सोच-समझ कर क्योंकि हजारों लोगों का भरोसा जुड़ा है।
मिर्जापुर से राजनीति की शुरुआत के सवाल पर उन्होंने कहा कि राजनीति के केंद्र बिंदु में मिर्जापुर सबसे महत्वपूर्ण है। साड़ी में कमल का फूल प्रिंट होने की चर्चा पर उन्होंने कहा कि साड़ी पर कमल का फूल जैसा कुछ नहीं था। कमल किसी का पेटेंट नहीं है। उन्होंने किसी पार्टी या उसके चुनाव चिह्न से किसी प्रकार के संबंध से पूरी तरह इन्कार किया।
अब सियासत में हाथ आजमाएंगी पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल, सरकारी सिस्टम-नौकरशाही को घेरा
हाल ही में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाली आईएएस दिव्या मित्तल ने सक्रिय राजनीति में आने का फैसला लिया है। उन्होंने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपने वैरीफाइड हैंडल पर वीडियो जारी किया, जिसमें राजनीति में स्वतंत्र रूप से आने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी भी दल में शामिल नहीं होंगी।
इस दौरान उन्होंने सरकारी सिस्टम और नौकरशाही पर हमला भी बोला। दिव्या मित्तल ने कहा कि मुझे लोगों की आवाज बनना है जो किसी दफ्तर तक नहीं पहुंचती है। पहुंच भी जाए तो सुनी नहीं जाती है। उन लोगों की तरफ से मुझे देश की आजादी के 80 साल का हिसाब चाहिए। हजारों गांवों में आज भी सड़क और पुल नहीं हैं।
इसका पीढि़यों से इंतजार है। मैं एक साधारण परिवार की लड़की थी। इस देश ने मुझसे वादा किया था कि पढ़ोगी तो बढ़ोगी। मैंने पढ़ा और आज आपके आगे हूं। आज जो बच्चे रात भर पढ़ रहे हैं और पेपर लीक हो जाता है।
पांच साल तक तैयारी करो और फैसला किसी अदालत में। जो किसान अपनी जमीन गिरवी रखकर अपने बेटे को इंजीनियर बना रहा है या जो मां अपने जेवर बेचकर बेटी को कोचिंग करा रही है, क्या उनका भविष्य सुरक्षित है।
हमारे बच्चों के भविष्य की चिंता किसी को नहीं
कोई सदन नहीं है जहां इसके बारे में बात हो रही हो। हमारे बच्चों के भविष्य की किसी को चिंता नहीं है। आज राजनीति में सत्ता, शिलान्यास, शोर तो है पर सोच नहीं है। उद्देश्य केवल एक राजनेता बदलने का नहीं है, राजनीति बदलनी होगी।
राजनीति शरीफ लोगों के लिए नहीं है। इसका जवाब मुझे अपने इस्तीफे के चंद घंटों में मिल गया। एक बड़ी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता ने लिखा कि मैं रात के अंधेरे में एक दूसरी बड़ी पार्टी के बड़े नेता से मिली। वह मुलाकात कभी नहीं हुई थी। उद्देश्य था कि एक औरत जो सवाल पूछने निकली है, उसको पहले ही दिन डरा दो।
एफआईआर, ट्रोल करा दो
दिव्या ने तंज कसते हुए कहा कि यही तो ये लोग करते हैं। किसी को एफआईआर करके डरा दो, ट्रोल करके बिठा दो ताकि आम आदमी, अच्छे लोग राजनीति में न आएं। इनकी राजनीति चलती रहे। हमें इसे बदलना है।
मैं डरूंगी नहीं, सवाल पूछूंगी
मैं डरूंगी नहीं, सवाल पूछूंगी। जिन्होंने मेरा समर्थन किया था, उन्हीं के साथ एक ऐसा मंच बनाएंगे। मेरे पास पैसा, बाहुबल जाति-धर्म का समीकरण नहीं है। जो पैसा चुनाव में बहाया जाता है, वह हमारी सड़क, पुल, स्कूल से आता है। जब मैं अधिकारी थी, तो न्याय करने से पहले कभी किसी का नाम नहीं पूछा। राजनीति में भी नहीं पूछूंगी।
यूपी की मिट्टी मेरी कर्मभूमि है। इसीलिए शुरुआत यहीं से होगी। उत्तर प्रदेश ने तो हमेशा राह दिखाई है। देवरिया में 'ऑपरेशन कब्जा मुक्ति' के दौरान लोगों ने खुद सरकारी जमीनों से कब्जे छोड़े। मुझ पर भरोसा मत करिए, अपने आप पर करिए। उन्होंने अपने व्हाट्सएप नंबर 9198956957 पर मैसेज करके जुड़ने की अपील भी की।