बाढ़ प्रभावित गांवों में नदियों का पानी उतरने के बाद दुश्वारियों का उफान आ गया है। घर, गृहस्थी और फसलें चौपट होने के साथ ही लंबे समय से खाना-पानी, बिजली और मवेशियों के लिए चारे-भूसे का संकट झेल रहे ग्रामीणों के समक्ष अब बीमारियां चुनौती बनकर पैर पसार चुकी हैं। सैकड़ों लोग संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं। मंगलवार को ढाब क्षेत्र के गांवों में हालात का जायजा लेने पहुंचे सीडीओ पुलकित खरे ने ग्रामीणों से समस्याएं पूछीं तो उनका दर्द छलक पड़ा।
मुख्य विकास अधिकारी दोपहर बाद ढाब क्षेत्र के चांदपुर, मुस्तफाबाद, रमचंदीपुर, गोबरहा और मोकलपुर गांव पहुंचे। उन्होंने ग्राम प्रधानों से संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए ब्लीचिंग पाउडर और दवाओं का छिड़काव कराने के लिए कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि ग्राम स्वच्छता एवं पोषण समिति के खाते से धन निकालकर ये काम कराएं। मोकलपुर और रमचंदीपुर के प्रधानों ने एएनएम की तैनाती की मांग की।
मुस्तफाबाद में हरिजन बस्ती में सीवर जाम होने पर सेक्रेटरी से सफाई कराने को कहा। मोकलपुर और गोबरहा में मार्ग अवरुद्ध होने की वजह से अभी तक पशुओं के लिए भूसा नहीं पहुंच सका है। इसके चलते पशुपालक परेशान हैं। ग्राम गोबरहा के प्रधान भोला राम और मोकलपुर के अनमोल सिंह ने भूसा मुहैया कराने की मांग की। इस पर सीडीओ ने उन्हें भरोसा दिलाया कि इसके लिए निर्देश दिए जा चुके हैं। किसी तरह की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।