नारी हमेशा से समाज को बदलने और सुधारने में आगे रही है। नारी शब्द नृ से बना है। नृ का मतलब धातु है। नारी हमेशा से मजबूत रही है। आज के समय में समाज और राजनीति में बदलाव करना बहुत जरूरी है और महिलाओं की मदद से यह बदलाव आसानी से किया जा सकता है।
- डॉ. विजय भारतीय सिंह, शिक्षिका, पीएम श्री राजकीय क्वींस इंटर कॉलेज
लेडीज फर्स्ट बोल कर महिलाओं को दया का पात्र न बनाया जाए। उन्हें अपने फैसले लेने की आजादी हो। नारी शक्ति किसी की मोहताज नहीं हैै। उनकी भागीदारी पॉलिसी मेकिंग में भी होनी चाहिए। डिफेंस, राजनीति, एविएशन आदि क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़नी चाहिए।
- पूनम अग्रवाल, चार्टर्ड अकाउंटेंट
नारी शक्ति को क्या करना है क्या नहीं, यह समाज न तय करे। हमसे उम्मीद की जाती है कि हम घर भी संभालें और नौकरी भी करें। महिलाओं की भागीदारी रियल स्टेट क्षेत्र में बढ़नी चाहिए। समाज में महिलाओं की सुरक्षा की बात हो, उन्हें सभी क्षेत्रों में मनमाफिक मौके और बिना भेदभाव वाला माहौल मिलना चाहिए। ताकि वो भी तरक्की करें।
- राशिका डिडवानिया, निदेशक, डिडवानिया ग्रुप व समाज सेविका
वैदिक काल से ही नारियां सशक्त रही हैं। मुगल काल से मौजूदा समय तक भेदभाव बढ़ा है। महिलाओं को समाज में बराबर का दर्जा मिलना चाहिए। हमें ये ध्यान देना चाहिए कि हम हमारे बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान न दें, उन्हें सामाजिक ज्ञान भी होना जरूरी है। बच्चों और बच्चियों को भी समझाना चाहिए कि उन्हें भटकना नहीं है।
- शशि बाला शाह, उप सभापति, काशी अग्रवाल समाज
महिलाओं सशक्त करना है तो सबसे पहले घर में समानता होना बहुत जरूरी है। घर में बेटों और बेटियों को बारबार का दर्जा दें। हमें दोनों को बताना होगा कि दोनों प्रतिद्वंदी नहीं बल्कि एक दूसरे के पूरक हैं। लड़कों को भी सिखाना होगा कि लड़कियों और महिलाओं का सम्मान करें।
- सुदेशना बसु, चार्टर्ड एकाउंटेंट
मातृत्व अगर मजबूत हो तो देश अपने आप मजबूत होगा। अगर औरतों को आज के समय में दबाया जा रहा है तो इसका कारण ये है कि जो दबा रहा है उसने घर से वही संस्कार पाए हैं। महिलाओं के अंदर खुद काबिलियत होनी चाहिए। नर या नारी में अंतर यही है कि नारी हमेशा से निस्वार्थ सेवा करती आई है।
- डॉ. आनंद प्रभा सिंह, प्रधानाचार्या, निवेदिता शिक्षा सदन बालिका इंटर कॉलेज
महिलाएं पहले से सशक्त हैं। वो पैदा ही सशक्त होती हैं। हमें कोई रियासत नहीं चाहिए, न ही किसी का एहसान चाहिए। हमारे जो अधिकार हैं वो मिलें, वही काफी है। समाज में महिला और पुरुष दोनों की भागीदारी बराबर की होनी चाहिए। महिलाएं अपने लिए समय निकालें और वो काम करें जो वो करना चाहती हैं।
- डॉ. आकांक्षा, अस्पताल प्रशासक, ट्रामा सेंटर बीएचयू
महिलाओं को समाज में बराबरी, निर्णय लेने की आजादी, अपना जीवन अपने हिसाब से जीने की इच्छा, अपनी बात को रखने की आजादी मिले तभी वे सशक्त होंगी। अगर हम नौकरी कर रहे हैं और सैलरी अपने हिसाब से खर्च नहीं कर सकते तो हम सशक्त नहीं हैं। हमें खुद अपने अधिकारों को समझना होगा।
- अनुराधा पांडेय, शिक्षिका, पीएम श्री राधा किशोरी बालिका इंटर कॉलेज, रामनगर
आज भी समाज में बेटियों के बाद बेटा चाहिए। सबसे पहले तो ये भावना खत्म होनी चाहिए। आज जांच से लेकर ऑपरेशन तक सभी महिलाएं कर रही हैं। महिलाएं कठिन से कठिन ऑपरेशन कर रही हैं। समाज में महिलाओं की महत्ता और उनकी भूमिका को समझने की आवश्यकता है।
-डॉ. ममता सिंह, स्त्री रोग विशेषज्ञ, बीएचयू
आज के समय में सभी को सिर्फ सफलता या असफलता दिखती है। कोई उसके पीछे की कहानी नहीं देखता। राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की शुरू से सशक्त भूमिका रही है। इसे आज के समय में पहचानने की जरूरत है। इतिहास से हमें सीखना चाहिए। हम अगर शिक्षित हों और जागरूक हों तो हमें कोई दबा नहीं सकता है। महिलाओं की सुरक्षा पर काम होना चाहिए।
-माधुरी यादव, एसआई, रेलवे पुलिस बल