स्पेशल टीम ऐसे करती है काम
- कोरोना संक्रमित कर्मचारियों का व्हाट्सएप्प ग्रुप बनाया गया है। जिसमें कर्मचारी अपनी समस्याओं को बता सकते हैं
- संक्रमित कर्मचारियों की जरूरत को पूरा करने के लिए 10,000 रुपये का निधि कर्मचारियों द्वारा बनाया गया है। जिसके द्वारा इनकी जरूरतों को पूरा किया जाता है
- संक्रमित कर्मचारी के द्वारा किए गए खर्चों को एक रजिस्टर में लिखा जाता है।
- संक्रमित कर्मचारियों को आईसोलेट करने और उनके घर को सैनिटाइजेशन करने की व्यवस्था की जाती है।
- फोन या व्हाट्सएप के जरिए संक्रमित कर्मचारी के द्वारा मांगी गई दिन प्रतिदिन इस्तेमाल की सामग्री को सुबह 7 से 9 बजे तक उपलब्ध कराने की व्यवस्था और दवा को 24 घंटे उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की गई है। इमरजेंसी के लिए 24 घंटे स्वयं सेवक उपलब्ध रहते हैं।
- सहायतार्थ टीम के सदस्यों द्वारा रोजाना संक्रमित कर्मचारियों से मोबाइल पर बातचीत की जाती है। जिससे संक्रमित कर्मचारियों को मानसिक एवं मनोवैज्ञानिक सहायता मिलती है।
- बहुत जरूरी होने पर सहायतार्थ टीम के सदस्य पीपीई किट पहनकर संक्रमित कर्मचारी से मिलकर समस्या का निवारण करते हैं।
- समस्त प्रक्रिया के संचालन की जानकारी नियमित रूप से मेडिकल विभाग एवं उच्च अधिकारियों को दी जाती है।
- सहायतार्थ टीम के द्वारा अब तक 7 कोरोना संक्रमित कर्मचारियों व उनके पारिवारिक सदस्यों एवं उनके पड़ोसियों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है।
डीरेका के प्रमुख मुख्य विद्युत इंजीनियर एसके कश्यप ने बताया कि संकट की इस घड़ी में लोको डिवीजन की यह नेक पहल सम्पूर्ण डीरेका सहित भारतीय रेल एवं अन्य औद्योगिक संस्थानों के लिए भी प्रेरणास्रोत है। टीम वाकई अच्छा काम कर रही है।