वाराणसी। गंगा किनारे पान थूकने वाले, साबुन लगाकर नहाने वाले, कपड़ा धोने वाले और सीवर बहाने वाले अब सावधान हो जाएं। हो सकता है गंदगी फैलाने के दौरान पीछे से कोई हट्टा-कट्टा अनुशासित सैनिक आपको पकड़ ले। इसके बाद आपको जुर्माना देना पड़ेगा। जुर्माना न देने पर जेल की हवा तक खानी पड़ सकती है। इसका ब्लूप्रिंट तैयार किया जा रहा है। ये बातें सोमवार को सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत में नेशनल मिशन ऑफ क्लीन गंगा के निदेशक टीवीएसएन प्रसाद ने कहीं। वे जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरोद्धार मंत्रालय के संयुक्त सचिव भी हैं।
उन्होंने बताया कि गंगा में प्रदूषण रोकने के लिए टेरीटोरियल आर्मी की तर्ज पर ‘गंगा ईको टास्क फोर्स’ का गठन होगा। इसमें भूतपूर्व सैनिक होंगे। टास्क फोर्स की चार बटालियन के लिए रक्षा मंत्रालय से एप्रूवल मिल गया है। साथ ही गंगा तट से लगा 500 मीटर का क्षेत्र कूड़ा मुक्त जोन होगा। गंगा को निर्मल करने के लिए केंद्र सरकार ने 1985 में 4000 करोड़ की योजना बनाई थी। जिसकी लागत छह
गुना बढ़ाकर 25 हजार करोड़ कर दी गई है। पहले चरण में गंगा में नालों के जरिये गिरने वाले सीवर को रोकना है। इसके लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण किया जा रहा है। प्रोजेक्ट के लिए डीपीआर और एसटीपी निर्माण की टेंडर प्रक्रिया अक्तूबर तक पूरी हो जाएगी। इसके दो साल बाद प्रोजेक्ट पूरा होगा। देश में गंगा किनारे के 118 शहर और 1650 ग्राम पंचायतों को भी गंगा निर्मलीकरण अभियान से जोड़ा जाएगा। सर्किट हाउस में उनके साथ मिशन के तकनीकी हेड देवेंद्र सिंह धकोला, जल निगम के एमडी पीके आसुदानी, प्रभारी डीएम विशाख जी समेत जल निगम के अधिकारी मौजूद रहे।