अपने सम्मान के साथ पूनम राय।
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पूनम राय बताती हैं कि यह पेंटिंग केवल चेहरों का संग्रह नहीं, बल्कि नारी शक्ति की भावनाओं का जीवंत दस्तावेज है। इसमें एक बेटी, बहन, मां, पत्नी, कर्मयोगी और संघर्षशील महिला के जीवन के लगभग हर भाव को चित्रित करने का प्रयास किया गया है। उनका कहना है कि 648 चेहरों में महिलाओं की खुशियां, पीड़ा, आत्मविश्वास, संघर्ष, त्याग, संवेदनाएं और सपने दिखाई देंगे। यही इस कलाकृति की सबसे बड़ी विशेषता है।
पूनम राय ने कभी अपनी परिस्थितियों को अपनी मंजिल के बीच नहीं आने दिया। उन्होंने लगातार मेहनत और कला के प्रति समर्पण के बल पर यह मुकाम हासिल किया। उनका कहना है कि यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय कला, महिला सशक्तीकरण और रचनात्मकता का वैश्विक स्तर पर सम्मान है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय अपने परिवार, शुभचिंतकों और कला प्रेमियों को दिया, जिन्होंने हर कदम पर उनका उत्साह बढ़ाया।
शुभचिंतकों के साथ चित्रकार पूनम।
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कला विशेषज्ञों का मानना है कि एक ही पेंटिंग पर तीन अंतरराष्ट्रीय विश्व रिकॉर्ड मिलना खास उपलब्धि है। इससे न केवल पूनम राय की पहचान वैश्विक स्तर पर और मजबूत हुई है, बल्कि वाराणसी की समृद्ध कला परंपरा को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई प्रतिष्ठा मिली है।
पूनम राय की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर वरिष्ठ पत्रकार अरविंद सिंह, लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत समेत अनेक कलाकारों, साहित्यकारों, शिक्षाविदों और कला प्रेमियों ने उन्हें बधाई दी। इस अवसर पर अनुष्का मौर्य, स्नेहा, शशि, निवेक्षा, विनय, महेंद्र, संजीवनी, रिचा सिंह, नीलू, स्नेहा राय, प्रिया सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।