गंगा किनारे की संस्कृति, खानपान और संगीत को समझने के लिए फिल्म अभिनेत्री दिया मिर्जा शनिवार की दोपहर काशी पहुंचीं। उन्होंने सत्तू का पराठा और पालक-बथुआ के साग के साथ आम के अचार का लुत्फ उठाया। उन्होंने घाटों के जीवन और गलियों के माहौल के बारे में भी जानकारी ली। उनके आने की भनक मिलने ही प्रशंसकों की भीड़ लग गई। एक टीवी चैनल के लिए डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग के लिए आईं दिया बनारस में तीन दिन बिताएंगी।
सिने तारिका दिया मिर्जा दोपहर करीब 12 बजे लक्सा स्थित पीडीआर मॉल के सामने गली में स्थित पहड़िया कोठी पहुंचीं। वहां कोठी की मालकिन अरुणा सिन्हा और उनकी बहन आशा सिंह से उन्होंने बनारस के खानपान के बारे में जानकारी ली। दिया ने अरुणा के घर में बने सत्तू के पराठे और बथुआ-पालक के साग के अलावा बैगन के भर्ते का स्वाद चखा। उन्हें आम का अचार खूब भाया। इस दौरान उन्होंने अरुणा दीदी से आम का अचार बनाने के तरीके पूछे। खाने के बाद सिने तारिका ने अरुणा के घर में घंटे भर आराम किया।
इसके बाद उन्होंने बनारस के घाटों, गलियों और रहन-सहन के बारे में जानकारी ली। अरुणा ने उन्हें बताया कि शाम की गंगा आरती विश्वविख्यात है। बनारस की सुबह का अलग ही आनंद है। सुबह-ए-बनारस का नाव से नजारा लेने की सलाह अरुणा ने दी।
मशहूर कचौड़ी-जलेबी के अलावा बनारस घराने की शास्त्रीय गायन की खूबियों का भी उन्होंने बखान किया। दोपहर बाद करीब पौने तीन बजे अरुणा के घर से जब वे बाहर निकलीं तो गली से लेकर सड़क तक प्रशंसकों की भीड़ लगी थी। सफेद-बदामी रंग के परिधान में उन्होंने हाथ हिलाकर प्रशंसकों का अभिवादन किया। दिया वहां से भेलूपुर स्थित संगीत विद्यालय ‘रूबरू हाउस’ पहुंचीं। दिया गंगा किनारे के शहरों के जीवन-संस्कृति पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग के लिए यहां आई हैं।