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तुलसी घाट पर चार दिवसीय ध्रुपद मेला का आगाज

Sun, 15 Feb 2015 02:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
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वाराणसी। ‘पवन चलत है माई री, फैल रही चांदनी’। नेपाल के विष्णु प्रसाद आचार्य ने राग विहाग की इस बंदिश को विस्तार देना शुरू किया तो गंगा की लहरें भी शांत होकर सुनने लगीं। कुछ इसी अंदाज में शनिवार की रात तुलसी घाट पर ध्रुपद मेला परवान चढ़ता रहा और दुनिया से भरे जुटे रसिक आनंद मगन सुनने रहे। अबकी बार मेले में जापान, जर्मनी, फ्रांस, इंग्लैंड सहित कई देशों के कलाकार हाजिरी लगाने के लिए आए हैं।
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महाराजा बनारस विद्या न्यास की ओर से आयोजित चार दिनी ध्रुपद मेले की पहली निशा की शुरुआत गायक ऋत्विक सान्याल ने राग गोरख कल्याण से की। आलापचारी के बाद उन्होंने चौताल में ‘शिव को जो भजे सदा’ के बाद शूलताल में राग केदार की बंदिश ‘गुरु का दर्शन मंगलकारी’ सुनाया। आपके साथ पखावज तापस दास ने संगत की। इटली के जियानी रिचागी ने विचित्र वीणा पर राग दरबारी की

अवतारणा की।  पखावज पर उनका साथ अंकित गुजराती ने दिया। नेपाल के विष्णु प्रसाद आचार्य ने राग विहाग के बाद धमार ताल में ‘दिन में राधा गोरी खेले निकसी होरी’ सुनाकर वासंती बयार बहा दी। रविंद्र गोस्वामी ने सुर बहार पर राग मालकौंस बजाया तो मधुछंदा ने सदी गायकी
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पेश की। संचालन डा. राजेश्वर आचार्य एवं प्रीतेश आचार्य ने किया। चार दिनों तक चलने वाले इस मेले में प्राचीन गायकी ध्रुपद की चार पीढि़यों के कलाकार शिरकत कर रहे हैं। अबकी मेले का स्वरूप अंतर्राष्ट्रीय हो गया है और इसमें मेले में इटली, जर्मनी जापान, इंग्लैंड, फ्रांस, दक्षिण अफ्रीका आदि देशों के कलाकार हाजिरी लगाने पहुंचे हैं।
 
40 साल  के रिकार्डिगिं की सीडी बनेगी
वाराणसी। ध्रुपद मेले का उद्घाटन करने के बाद कुंवर अनंत नारायण सिंह ने कहा कि मेले में 40 साल के गायन और वादन की रिकार्डिगिं रामनगर किले में सुरक्षित है। उसकी डीवीडी तैयार कराई जाएगी और पुस्तकालयों में रखा जाएगा। संकट मोचन के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने ध्रुपद के लिए शोध संस्थान खोलने की मांग की। इस मौके पर डा. वीएन मिश्रा सहित तमाम संगीत रसिक मौजूद रहे।
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