धर्म संसद में मौजूद लोग
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श्रीराम मंदिर निर्माण पर संत, महात्माओं, महामंडलेश्वर व विद्वानों ने कहा कि अब सब्र का बांध टूट रहा है, इसलिए श्रीराम मंदिर बनना चाहिए। मंदिर बन गया तो राजनीति करने वालों की राजनीति समाप्त हो जाएगी। वहीं हमारे आराध्य भी मंदिर में निवास करने लगेंगे। संसद की कार्यवाही के दौरान जल पुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि लोग श्रीराम मंदिर के बजाय खुले में भगवान राम का स्टैच्यू बनाना चाह रहे हैं, यह गलत है।
प्रतिमा धूप, आंधी और बारिश में खुले आसमान के नीचे रहेगी, इसलिए यह धर्म संसद ऐसे लोगों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव ला रही है। प्रस्ताव का लोगों ने करतल ध्वनि और हर हर महादेव के नारे से समर्थन किया, लेकिन प्रवर धर्माधीश ने अगले वक्ता को आमंत्रित कर दिया।
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उधर, धर्म संसद के लिए जहां संसद भवन की तरह ही टेंट लगाया गया है, वहीं गोशाला भी बनाई गई है। गोशाल में बांधे गए गाय-बछड़ों का श्रद्धालु पूजन कर रहे थे। सभी प्रवेश द्वार का नाम वेदों के नाम पर रखा गया है। शाम को काशी की परंपरा के अनुसार गंगा आरती की तर्ज पर पांच वैदिक ब्राह्मणों ने यहां आरती उतारी। कार्यक्रम स्थल और परिसर के बाहर तीन बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गई थी, जहां से लोग सजीव प्रसारण देख रहे हैं।
श्रीराम जन्मभूमि मामले में हिंदू पक्ष के पैरोकार सुप्रीमकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता परमेश्वर नाथ मिश्र ने कहा कि श्रीराम मंदिर मुद्दे पर धर्म संसद तटस्थ है। यहां जो भी हल निकलेगा, उससे पूरी दुनिया सहमत होगी।
अगर विधेयक लाकर मंदिर बनवाया जाएगा तो विश्व में हमारे देश की छवि खराब होगी। देश का हर नागरिक चाहता है कि श्रीराम मंदिर का निर्माण हो। उन्होंने यह भी कहा कि यह तो स्पष्ट हो चुका है कि वहां कोई मस्जिद थी ही नहीं, इसलिए राम मंदिर बनने से कोई रोक नहीं सकता।