सांसद और विधायक न होने के बाद भी ऊंची पहुंच के कारण धनंजय सिंह को वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी। 2018 में उनकी सरकारी सुरक्षा के खिलाफ दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि 24 से ज्यादा आपराधिक मामले वाले नेता की सुरक्षा में सरकारी अमला क्यों लगा हुआ है...?
इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा था कि पूर्व सांसद को पुलिस सुरक्षा मिलने के बाद भी उन पर मुकदमे दर्ज हो रहे हैं। मई 2018 में प्रदेश सरकार की ओर से सरकारी वकील ने अदालत को बताया था कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने धनंजय सिंह को मिली वाई श्रेणी की सुरक्षा हटा ली है। उधर, नौ जुलाई 2018 को बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या कर दी गई।
मुन्ना की पत्नी सीमा सिंह ने पूर्व सांसद धनंजय सिंह, रिटायर्ड डिप्टी एसपी जेएन सिंह, प्रदीप सिंह उर्फ पीके, महराज सिंह और विकास उर्फ राजा पर पति की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की। बागपत पुलिस ने जांच के बाद कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात बदमाश सुनील राठी के अलावा बजरंगी की हत्या में अन्य किसी की संलिप्तता से संबंधित साक्ष्य नहीं मिला है।