वाराणसी। धान की खेती करने वाले किसानों के लिए खुशखबरी है। अब बाढ़ के पानी में भी धान की फसल लहलहाएगी। अगर खेत में बीज 15 दिन भी डूब जाता है तो उसका उत्पादन पर काई असर नहीं पड़ेगा। बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान में हुए एक शोध और फिर इसकी टेस्टिंग में सफल परिणाम आए हैं। बीएचयू कृषि प्रक्षेत्र में तैयार सरजू 52 और मालवीय 105 बीज पर यह प्रयोग हुआ और सफलता के बाद हैदराबाद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ राइस रिसर्च में भेजा गया।
पूर्वांचल में बलिया, आजमगढ़, मऊ, चंदौली आदि ऐसे क्षेत्र हैं जहां अधिकांश किसान धान की खेती करते हैं। हर साल इस क्षेत्र में बाढ़ के समय किसानों की फसलें डूब जाती हैं। इससे समय के साथ ही आर्थिक नुकसान भी अधिक होता है। अब उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान के प्रो. पीके सिंह के निर्देशन में हुए एक शोध में बाढ़ग्रस्त इलाकों के लिए ऐसे धान की वेरायटी विकसित की गई, जिसमें पानी में डूबने के बाद भी वह सुरक्षित रहे। इसमें सबवन जिन को आईआर 64 सबवन वेरायटी में ट्रांसफर किया गया।
प्रो. सिंह ने बताया कि मालीक्यूलर ब्रीडिंग राइस लैब के साथ ही फार्म पर एक गड्ढा बनाकर उसमें सरजू 52 और मालवीय 105 बीज डाला गया। इसमें यह देखा गया कि पानी में 15 दिन डूबने के बाद भी फसल उत्पादन एक हेक्टेयर जमीन में 35 से 40 प्रतिशत हुआ। प्रो. सिंह ने बताया कि संस्थान में जांच के बाद सफलता मिलने के साथ ही राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर गुणवत्ता बरकरार रही।
आईआईआर ने भी लगाई मुहर
बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान में परीक्षण में मिली सफलता के बाद धान की उस वेरायटी को नेशनल टेस्टिंग के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट आफ राइस रिसर्च (आईआईआर) हैदराबाद में भेजा गया। प्रो. सिंह ने बताया कि यहां भी उत्पादन क्षमता पर कोई असर नहीं हुआ। यहां मुहर लगने के बाद लखनऊ स्थित कृषि निदेशालय ने भी इसकी जांच की। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अब इसे कृषि मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा।