इसको ध्यान में रखते हुए इस बार पुलिस प्रशासन ने प्रवेश और निकास अलग-अलग कर दिया था। इससे प्रवेश करने के बाद लोगों को दूसरे रास्ते से कुंड से बाहर निकाल दिया गया। कुंड में पानी भरा था लेकिन बहुत गर्मी के कारण श्रद्धालुओं को परेशानियां हुईं।
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कई महिलाओं और बच्चों को गर्मी के चलते चक्कर आने लगे। स्थानीय लोगों ने उनको पानी पिलाया और छांव में बैठाया, तब जाकर उनको राहत मिली। एनडीआरएफ के जवानों ने बताया कि करीब पांच से छह महिलाएं गर्मी से बेहोश हुई थीं।
चोर उचक्के रहे सक्रिय :
पुलिस की लापरवाही के कारण लोलार्क कुंड मेले में चोर उचक्के सक्रिय रहे। लोलार्क कुंड में स्नान करने के लिए लाइन में लगे लोगों के जेब से मोबाइल और पर्स को उचक्कों ने गायब कर दिया। इस दौरान भीड़ ने आधा दर्जन महिला चोरों को पकड़ कर पुलिसकर्मियों को सौंप दिया।
सड़कें बनी पार्किंग स्थल, हर तरफ लगा जाम :
लोलार्क कुंड में पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए स्नान करने के लिए लाखों की तादात में श्रद्धालु पहुंचे थे। नगर निगम द्वारा वाहन पार्क करने का जगह नहीं बनाए जाने के कारण सड़क पर वाहनों को पार्क कर दिया गया। इसके कारण अस्सी, रवीन्द्रपुरी, लंका-अस्सी मार्ग सोनारपुरा भेलूपुर तक जाम हो गया। जाम को छुड़ाने की जिम्मेदारी तैनात पुलिसकर्मी मेले में घुमकर तफरी करते रहे हैं। स्नान के बाद शाम कपड़ों और चप्पल से पूरा इलाका पट गया था।
ये है मान्यता :
ज्योतिषाचार्य पं गणेश प्रसाद मिश्र ने बताया कि मान्यता के अनुसार शिव भक्त विधुन्माली दैत्य को जब सूर्य ने हरा दिया, तब भगवान शिव सूर्य पर क्रोधित हो गए और त्रिशूल हाथ में लेकर दौड़े। उस समय सूर्य भागते हुए काशी में आकर गिरे, इसी से वहां उनका लोलार्क नाम पड़ा। सप्तमी प्रयुक्त भाद्रपद शुक्ल षष्ठी को स्नान, दान, जप और व्रत करने से अक्षय फल प्राप्त होता है। विशेषकर सूर्य का पूजन, गंगा का दर्शन और पंचगव्य प्राशन से अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है।