बाबा विश्वनाथ से पहले काशी में विराजमान हैं मां अन्नपूर्णा
महंत शंकर पुरी ने बताया कि काशी में मां अन्नपूर्णा का वास भगवान विश्वनाथ के आगमन से पहले हो चुका था। मां अन्नपूर्णा का दर्शन तो भक्तों को नियमित मिलता हैं, लेकिन खास स्वर्णमयी प्रतिमा का दर्शन प्रति वर्ष में सिर्फ चार दिन धनतेरस से अन्नकूट तक ही मिलता है।
कमलासन पर विराजमान हैं मां अन्नपूर्णा
मंदिर के प्रबंधक काशी मिश्रा ने बताया कि स्वर्ण अन्नपूर्णा कमलासन पर विराजमान हैं। रजत प्रतिमा में विराजमान काशीपुराधिपति की झोली में स्वयं भगवती अन्नदान दे रही हैं। वहीं भगवती अन्नपूर्णा के दाईं ओर देवी लक्ष्मी और बाईं तरफ देवी भूदेवी विराजमान हैं। काशीवासियों समेत पूरे देश के पालन पोषण का पूरा दायित्व मां भगवती पर है। धार्मिक पुस्तक काशी-रहस्य के अनुसार भवानी ही अन्नपूर्णा हैं। जब से माता अन्नपूर्णा काशी में विराजमान हुईं और यह मंदिर काशी के प्रधान देवीपीठ में एक माना जाता है।