काशी में भगवान जगन्नाथ के जागते ही खुशियां छा गई हैं। झूमते इंद्र की फुहारों के बीच प्रभु की डोली निकली तो चहुंदिशि जयघोष होने लगा। इसी के साथ भगवान और भक्तों के प्रेम का सहज रिश्ता साकार होने की घड़ी आ गई। रथारूढ़ भगवान सैर-सपाटा करेंगे। उस रथ के पहियों को छूकर कोई मगन होगा तो कोई रथ को खींचकर निहाल हो उठेगा। तो तैयार हो जाइए उस आध्यात्मिक रंग में रंगने के लिए। भोले की नगरी में तीन दिवसीय रथयात्रा बुधवार से शुरू हो जाएगी...।
उत्सवों के शहर बनारस में मंगलवार की अस्ताचलगामी बेला कभी इंद्र की फुहारों से भींगी तो कभी भगवान की डोली उठाने वाले कहारों के जीवन को धन्य कर गई। भगवान जगन्नाथ की डोली जिस रास्ते से गुजरी, उधर से छतों-बारजों से लोगों ने जमकर पुष्प वर्षा की। कहीं जयकारे लगाए गए तो कहीं आरती उतारी गई। एक तरफ भगवान की डोली देर शाम बेनी राम के बगीचे में पहुंची तो दूसरी ओर रिमझिम फुहारों के बीच रथयात्रा की सड़क की पटरियों पर नान खटाई के अलावा महिलाओं, बच्चों की पसंद की वस्तुओं का अनूठा मेला सजने लगा।
अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर से शाम चार बजे ध्वजा, पताका के साथ भगवान जगन्नाथ की पालकी निकाली गई।
मंदिर परिसर में भक्तों का जन सैलाब भगवान के दर्शन के लिए उमड़ पड़ा। सविधि शृंगार, पूजा के बाद प्रभु जगन्नाथ के साथ भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की प्रतिमाओं को पालकी पर विराजित कराया गया। पालकी उठाने के लिए पूरा मुहल्ला उमड़ पड़ा। गगनभेदी जयकारे के साथ भक्त भगवान की पालकी लेकर अस्सी से पद्मश्री चौराहा, गुरुधाम, खोजवा (कश्मीरीगंज) से बैजनत्था होते हुए रथयात्रा पहुंचे। शाम पांच बजे बेनीराम के बगीचे में पालकी दर्शन के लिए तांता लग गया। दूसरी ओर भगवान का रथ शहीद उद्यान से निकाल कर रथयात्रा चौराहे पर सजा दिया गया। मध्यरात्रि के बाद श्वेत वस्त्रों, पुष्पों से पुजारियों ने भगवान की प्रतिमाओं का शृंगार किया। इसके बाद प्रभु को रथारूढ़ किया। सुबह सवा पांच बजे आरती-पूजा के साथ भगवान के दर्शन शुरू हो जाएंगे और मेला गुलजार हो जाएगा।
रथयात्रा में करीब डेढ़ किलोमीटर क्षेत्र में सड़कों पर लक्खी मेले ने रात को ही आकार ले लिया। लक्सा से महमूरगंज तक और सिगरा से कमच्छा रोड तक दोनों पटरियों पर नान खटाई की दूकानें सज गईं। मेले में हर किसी की पसंद की वस्तुओं के स्टाल लगे हैं। रंग-बिरंगे गुब्बारे, खिलौने, बनारसी चाट और झूले तो बच्चों, महिलाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गए हैं।