शीतलाष्टमी व कालाष्टमी पर भक्तों ने व्रत रखकर पूजन अर्चन कर सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना की। सुबह से मंदिरों में भैरव बाबा का शृंगार कर पंचोपचार, दशोपचार एवं षोडशोपचार पूजन हुआ। धूप-दीप, नैवेद्य, पुष्प, ऋतुफल आदि अर्पित कर पूजा हुई।
कालाष्टमी व शीतलाष्टमी की तिथि एक ही दिन होने पर शनिवार को बाबा भैरव और शीतला माता मंदिरों में दर्शन पूजन के लिए भक्त पहुंचे। बाबा कालभैरव और बटुक भैरव एवं दशाश्वमेध घाट स्थित बड़ी शीतला मंदिरों में भक्तों की भीड़ रही। उन्होंने व्रत रखकर पूजन अर्चन कर सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना की।
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हर माह कालाष्टमी पर भैरव बाबा के दर्शन पूजन कर विधान है। शनिवार को भगवान शिव के स्वरूप बाबा भैरव की आराधना के लिए भैरव मंदिरों में भक्त पहुंचे थे। भक्त व्रत रखकर भैरव मंदिरों में दर्शन पूजन किए। मंदिरों में भैरव बाबा का शृंगार कर पंचोपचार, दशोपचार एवं षोडशोपचार पूजन हुआ। धूप-दीप, नैवेद्य, पुष्प, ऋतुफल आदि अर्पित कर पूजा हुई। बाबा को प्रिय उड़द की दाल से बने बड़े, इमरती आदि मिष्ठान का भोग लगा। काशी में विराजमान अष्टभैरव के रौद्र, प्रचण्ड व बालरूप का दर्शन कर सुख-समृद्धि के साथ निरोग रहने की कामना की।
मां शीतला की बसियउरा पूजा
बड़ी शीतला मंदिर में भक्तों ने सुबह बसियउरा पूजा की। महंत शिव प्रसाद पांडेय लिंगिया महाराज के सानिध्य में सुट्टू महाराज ने भोर में मां को पंचामृत व गंगा स्नान के बाद नवीन वस्त्र, आभूषण पहनाकर और मुखौटा लगाया। रोली, चंदन लगाकर सुगंधित पुष्पों से शृंगार किया। मंगला आरती हुई।
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महंत परिवार ने मां का बसियउरा पूजा की। इसके बाद भक्तों ने दोपहर तक पूजन किया। उन्होंने पूड़ी, सब्जी, गुलगुला, हलुआ, भीगा चना, बताशा, दही, आम आदि चढ़ाकर विधिवत पूजन किया। शाम को भी शृंगार व आरती हुई और दर्शन के लिए भक्त पहुंचे थे।