हंसराज रघुवंशी की प्रस्तुतियों पर झूमे श्रद्धालु
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श्रीकृष्णगिरी पीठाधीश्वर डॉ. बसंत विजय महाराज ने कहा कि काशी की मिट्टी किसी को भक्ततो किसी को गुरु बना देती है। श्रेष्ठ पदवी का सम्मान भी दिला देती है। काशी में पांच कोस की परिधि वह स्थान है जहां ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ था। यही कारण है कि पांच कोस की इस परिधि में यमराज का प्रवेश वर्जित है। इस पांच कोस के घेरे में निवास करने वालों के प्राण हरण का दायित्व स्वयं शिव पूर्ण करते हैं। यहां के निवासियों का लेखाजोखा चित्रगुप्त नहीं कालभैरव रखते हैं।
शनिवार को काशी कोतवाल काल भैरव उत्सव के चौथे दिन नरिया स्थित चौधरी लॉन में प्रवचन के दौरान डॉ. बसंत विजय महाराज ने कहा कि त्रैलोक्य में ऐसी विशिष्टता वाला दूसरा कोई स्थान है ही नहीं। कहा कि जिसमें भी आगे बढ़ने की तड़प बनी रहती है वह तृप्त नहीं होता। अपनी तड़प को जिस दिन अपने आराध्य के लिए मन में पैदा कर लोगे यह मन तुम्हें ऊंचाई की ओर ले जाएगा।