करता करे न कर सके, गुरु करे सो होए। तीन लोक नौ खंड में, गुरु से बड़ा ना कोए...। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर साल भर बाद गुरु की चौखट पर शिष्यों ने मत्था टेका। कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए गुरु चरणों की रज को माथे से लगाया। आश्रम बंद रहे और चौखट पर ही गुरु की पूजा कर विधान पूर्ण किए। कहीं शिष्यों को सीधे गुरु का आशीर्वाद मिला तो कहीं वर्चुअल।
धर्म की नगरी काशी में गुरु पूर्णिमा पर लगातार दूसरे साल डिजिटल मंच पर गुरु पूजन संपन्न हुआ। शनिवार को आषाढ़ पूर्णिमा पर सुबह से ही आश्रम, मठ और मंदिरों में गुरु पूजन की शुरुआत हुई। कोरोना संक्रमण की वजह से गुरु पूर्णिमा के मौके पर मठ मंदिरों में लोगों की की भीड़ उम्मीद से काफी कम रही। गुरु चरणों की रज माथे पर लगाने की कामना और मंशा के साथ कम ही लोग मठ मंदिरों और आश्रमों में आए। जो आस्थावान गुरु आश्रम में पहुंचे गुरु चरणों को नमन कर प्रसाद ग्रहण कर घरों की ओर रुख किया। घरों में भी लोगों ने गुरु पूजन किया। पड़ाव स्थित अघोरपीठ आश्रम में प्रभात फेरी और ध्वजारोहण के साथ महोत्सव की शुरुआत हुई। इसके बाद गुरु पदसंभव राम ने गुरु पूजन के बाद शिष्यों को दर्शन दिया। पीठाधीश्वर 108 स्वामी सरनानंद महाराज ने सभी गुरुओं के पूजन के बाद शिष्यों को दर्शन दिया।
पंचक्रोशी रोड देवरा गांव स्थित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने गुरु पूजन के साथ पूर्णिमा महोत्सव की शुरुआत की। शिष्यों ने आश्रम में पूजन अर्चन कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर भंडारे का भी आयोजन हुआ। संत कबीर की साधनास्थली कबीरचौरा मूलगादी में महंत विवेकदास ने गुरु पूजन के बाद सोशल डिस्टेंसिंग के साथ दर्शन दिए। धर्मसंघ में पीठाधीश्वर शंकर देव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज ने गुरु पूजन किया।
सतुआ बाबा आश्रम में महामंडलेश्वर संतोष दास ने भी अपने आश्रम में अपने गुरु ब्रह्मलीन यमुनाचार्य जी महाराज का पूजन-अर्चन किया। इस दौरान शिष्यों ने महामंडलेश्वर संतोष दास का दर्शन पूजन कर आशीर्वाद लिया। भृगु ज्योतिष आश्रम चौकाघाट में गुरु पूर्णिमा उत्सव का आयोजन किया गया। वेद पारायण केंद्र में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष ने गुरु पूजन किया। मच्छोदरी स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर में गुरु पूजन हुआ। हीराभगत एवं वासुदेव चरण दास के चित्र पर माला फूल चढ़ाकर पूजन अर्चन हुआ।
गुरु की प्राप्ति से होता है कल्याण
रविदास पार्क स्थित दुर्गा मातृ छाया शक्तिपीठ में गुरु पूजन हुआ। देवी उपासिका साध्वी गीतांबा तीर्थ ने गुरु की चरण पादुका व दंडी संन्यासियों का पूजन के बाद गुरु पूर्णिमा की शुरुआत की। तुलसी घाट स्थित तुलसी मंदिर में गुरु पूर्णिमा के पर्व पर अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने श्री रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी का पूजन किया। इसके पूर्व प्रो. मिश्र ने अपनी माता का भी पूजन अर्चन किया।
धर्मों के बंधन से मुक्त रही गुरू की पूजा
पातालपुरी मठ में गुरुपूर्णिमा पर धर्म के बंधन से मुक्त होकर गुरु पूजन संपन्न हुआ। पीठाधीश्वर महंत बालक दास से शिष्यों ने आशीर्वाद लिया। मुस्लिम महिला फाउंडेशन की नाजनीन अंसारी ने महंत की आरती उतारकर श्रीरामनाम दुपट्टा भेंट किया। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के पूर्वांचल सह संयोजक मो. अजहरूद्दीन, अफसर बाबा, शफीक अहमद ने भी बालक दास का दर्शन किया।
घर पर ही रह कर मनाया गुरु पूर्णिमा का पर्व
अघोरपीठ बाबा कीनाराम स्थल रवींद्रपुरी में गुरुपूर्णिमा का पर्व आश्रम में रह रहे अनुयायियों ने सादगी के साथ मनाया। इस दौरान भक्तों के लिए लगातार दूसरी बार गुरु की चरण वंदना और दर्शन की मनोकामना पूर्ण नहीं हो पाई। घर पर ही रहकर भक्तों ने गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया। उधर, संत कबीर प्राकट्य स्थली लहरतारा में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरु पूजन हुआ। महंत गोविंद शास्त्री का शिष्यों ने दर्शन पूजन किया।
शकरकंद गली में हुआ गुरु पूजन
महर्षि द्वादश ज्योर्तिलिंग परिक्रमा स्थल शकरकंद गली में गुरुपूर्णिमा महोत्सव का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि बिहारी पुरी मठ मंदिर के महंत स्वमी जयकिशन पुरी रहे। अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से गुरु पूर्णिमा का महापर्व मनाया गया। गायत्री साधकों ने गायत्री महामंत्र, महामृत्युंजय महामंत्र, महाकाल मंत्र, नवग्रह मंत्र एवं सूर्य गायत्री महामंत्र से आहुतियां अग्निहोत्र किया।