कड़ी सुरक्षा के बीच संत निरंजन दास बेगमपुरा ट्रेन से जालंधर रवाना
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डेरा सच्चखंड बल्लां के गद्दीनशीं संत निरंजन दास गुरुवार को संत रविदास की जन्मस्थली से वापस जालंधर रवाना हो गए। गुरु को विदा करते समय अनुयायियों की आंखें झलक उठीं। विश्वशांति और कल्याण की प्रार्थना के साथ जन्मस्थान की धूल सिर-माथे लगाकर अगले साल फिर आने के संकल्प के साथ रैदासी विदा हुए। इसी के साथ तीन दिवसीय जयंती समारोह का समापन हो गया।
हालांकि मेला क्षेत्र देर शाम तक ग्राहकों की भीड़ से गुलजार रहा। गुरु के दरबार से लौट रहे अनुयायियों ने मेले में जमकर खरीदारी की। इससे पहले सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा था। सतगुरु रविदास के दर्शन और संत निरंजन दास का आशीर्वाद लेने के लिए सुबह से ही अनुयायी मंदिर परिसर में जमा रहे।
दोपहर से वापसी का सिलसिला शुरू हो गया। देश-विदेश से आए श्रद्धालु मेले से कुछ न कुछ सामान खरीदकर उसे मंदिर में चढ़ा रहे थे और प्रसाद के रूप में उसे लेकर घर वापस लौट रहे थे। दोपहर करीब 12:15 बजे संत निरंजन दास मंदिर से बाहर आए ओर सजी हुई कार में जेड सुरक्षा के बीच स्थानीय पुलिस के साथ जब निकले तो उनके पीछे-पीछे भक्तों का हुजूम श्रद्धामय हो हाथ जोड़े, निकलने वाले रास्ते को नमन करते हुए गुरु चरणों केी धुल सिर-माथे लगाते चल पड़ा।
मंदिर के ट्रस्टी केएन सरोवा, जनरल सेक्रेटरी सतपाल बिरदी और मैनेजर ज्ञानचंद ने जयंती शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होने पर सभी का आभार जताया। अपराह्न तीन बजे अनुयायियों के साथ संत निरंजन दास कैंट स्टेशन पहुंचे।
यहां उन्हें वीआईपी लाउंज में बैठाया गया। स्टेशन पर स्वागत सत्कार के बाद करीब 3:30 बजे बेगमपुरा स्पेशल ट्रेन से संगतों संग सत निरंजन दास काशी से जालंधर के लिए रवाना हो गए।