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ऐतिहासिक पचबहनी स्नान के लिए उमड़ा आस्था का रेला, जानिए इस स्नान पर्व का महत्व

Tue, 16 Jan 2018 11:42 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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पांच लाख श्रद्धालुओं ने मिनी कुंभ में लगाई डुबकी - फोटो : अमर उजाला
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मौनी अमावस्या पर लगने वाले पचबहनी स्नान पर्व पर आस्था का रेला उमड़ पड़ा। महिलाएं सिर पर गठरी लिए मां गंगा के गीत गाते हुए पचबहनी स्नान के घाट की ओर बढ़ रहीं थी। गंगा में डुबकी लगा कर श्रद्धालुओं ने जरूरतमंद लोगों को अन्नदान किया। गौराउपरवार, चन्द्रावती, परनापुर, रामपुर, सरसौल बलुआ घाट पर करीब पांच लाख लोगों ने मिनी कुंभ में डुबकी लगाई।
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 प्रसिद्ध ऐतिहासिक पचबहनी स्नान पर्व का काफी महत्व है। यह वही स्थान है जहां मां गंगा की जिद पर भगीरथ को पश्चिम दिशा में जाना पड़ा। बलुआ सरसौल से परनापुर, मुरीदपुर, गौराउपरवार, रामपुर, चंद्रावती तक गंगा पश्चिम दिशा में बहती हैं। यहां स्नान करने के लिए पूर्वांचल भर से लोग आते हैं और अपने परिवार के लिए मन्नत करते हैं।

भोर के चार बजे के बाद ही गंगा तटों पर ठहरे लोग कोहरे व ठंड की परवाह किए बगैर आस्था का गोता लगाने लगे। सुबह आठ बजे के बाद लगातार घाटों पर भीड़ लगने लगी जो दोपहर दो बजे तक चली। दोपहर बाद स्नानार्थियों का रेला आसपास के कस्बों चौबेपुर, जाल्हूपुर, भगतुआ, सोनबरसां, चंद्रावती आदि जगहों पर मेले के रूप में परिवर्तित हो गया।
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महिलाओं ने घरेलू सामानों की जमकर खरीदारी की। घाटों पर सुरक्षा के लिए पुलिस के जवान निगहबानी करते रहे। वहीं गंगा घाटों पर एनडीआरएफ के जवान डटे रहे। पुलिस ने कादीपुर रेलवे क्रासिंग के पास बैरिकेडिंग लगाकर वाहनों को रोक दिया गया था। वहां से महिलाएं गौराउपरवार घाट व परनापुर घाट करीब चार से पांच किलोमीटर पैदल जाकर स्नान कीं।

घाटों पर कपड़े बदलने की व्यवस्था न होने से महिलाओं को परेशानी उठानी पड़ी। सोनबरसां में भाजपा कार्यकर्ताओं ने चाय व एनडीआरएफ व कादीपुर खुर्द प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की तरफ से नि:शुल्क चिकित्सा की व्यवस्था थी। वही ग्रामीणों ने भी जगह जगह पुआल व अलाव की व्यवस्था की थी।
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मौनी अमावस्या पर गंगा में लगी आस्था की डुबकी

बनारस के घाटों पर स्नानार्थियों की उमड़ी भीड़, भक्तों ने किया तिल का दान - फोटो : अमर उजाला
 मौनी अमावस्या पर मंगलवार को गंगा स्नान के लिए घाटों पर भक्तों की भीड़ उमड़ी। गंगा नदी में डुबकी लगाने के बाद भक्तों ने तिल का दान किया। भक्तों की भीड़ सुबह से लेकर दोपहर दो बजे तक घाटों पर रही। भक्तों ने सूर्य की उपासना के साथ भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की। 

काशी के विभिन्न गंगा घाटों पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने पतित पावनी में डुबकी लगाई। इस बारे में घाट के पुजारी रामजतन ने बताया कि मौनी अमावस्या के दिन स्नान, दान, जप और होम किया जाता है। इससे पूरे माघ माह का शुभ फल प्राप्त होता है। आज के दिन स्नान के बाद दान का भी विधान है। इस दिन तिल का दान करना चाहिए। इससे यश में वृद्धि होती है।

मौन रहने से मन और गंगा स्नान से तन, दान करने से धन की शुद्धि होती है। काशी में वैसे तो स्नान, दान का अपना अलग ही महात्म्य है। पुण्यकाल में मोक्ष दायिनी गंगा में डुबकी लगाने से जन्म जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है। ऐसी प्राचीन मान्यता है। अमावस्या वैसे तो हर महीने में दो बार पड़ती है लेकिन माघ मास की अमावस्या का अपना एक अलग ही महात्म्य है।

इस दिन बनारस के घाटों पर मां गंगा में डुबकी लगाने के लिए विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु आए। मौनी अमावस्या का पावन पर्व पौराणिक काल काल से ही चला आ रहा है।  मौनी अमावस्या यानी भगवान ब्रह्मा के स्वयंभू पुत्र ऋषि मनु के जन्म का दिन। इस दिन को मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। ऋषि मनु ने आजीवन मौन रहकर तपस्या की थी इसलिए आज की तिथि को मौनी अमावस्या कहा जाता है।

इस पावन पर्व का वर्णन गोस्वामी तुलसी दास ने भी रामचरित मानस में किया है। मान्यता है की मौनी अमावस्या के दिन मौन रहकर सूर्य उदय से पहले जब आकाश में लालिमा हो तो संकल्प लेना चाहिए। इस दौरान पावन तीर्थों में स्नान करने से हर मनोकामना की पूर्ति होती है।
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