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Dev Diwali 2022: काशी के कुम्हारों के घरों को भी रोशन कर रही देव-दीपावली, 90 फीसदी महिलाएं बना रहीं दीये

Sun, 06 Nov 2022 08:16 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

काशी में क्लस्टर चलाने वाले और काशी पॉटरी के महासचिव राजेश त्रिवेदी ने बताया कि उनके पास समितियों की ओर से करीब ढाई लाख दीयों के ऑर्डर मिले हैं। वाराणसी में 1500 से अधिक परिवार कुम्हार का कार्य करते हैं। सिर्फ क्लस्टर में करीब पांच सौ आर्टिजन काम कर रहे हैं। जो लगभग पांच सौ रुपये रोजाना कमा लेते हैं। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लोकल से ग्लोबल हुई काशी की देव दीपावली विश्व में सनातन धर्म को रोशन करने के साथ ही काशी के कुम्हारों के घरों को भी रोशनी से भर रही है। दीपावली के बाद देव दीपावली पर ऑर्डर ने इनके चेहरों पर मुस्कान बिखेरी है। बाती बनाने वालों को भी अच्छा रोजगार मिल रहा है। 
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से साल दर साल भव्य होती जा रही देव दीपावली जहां एक ओर काशी के अर्द्धचंद्राकार घाटों को अलौकिक स्वरूप प्रदान कर रही है। वहीं, लाखों की संख्या में जलाए जाने वाले दीयों के कारण कुम्हारों की जिंदगी भी बदल रही है।

काशी के घाटों को रोशन करने के लिए योगी सरकार ने 10 लाख दीयों और बाती का ऑर्डर दिया है। देव दीपावली समिति और अन्य निजी संस्थाओं ने भी ऑर्डर दिया है। जनता भी दीये खरीद रही है। 
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काशी में क्लस्टर चलाने वाले और काशी पॉटरी के महासचिव राजेश त्रिवेदी ने बताया कि उनके पास समितियों की ओर से करीब ढाई लाख दीयों के ऑर्डर मिले हैं। वाराणसी में 1500 से अधिक परिवार कुम्हार का कार्य करते हैं। सिर्फ क्लस्टर में करीब पांच सौ आर्टिजन काम कर रहे हैं। जो लगभग पांच सौ रुपये रोजाना कमा लेते हैं। 
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उन्होंने बताया कि क्लस्टर में दीया बनाने वाली 90 प्रतिशत महिलाएं हैं। कुम्हार विकास प्रजापति का कहना कि पीएम मोदी और मुख्यमंत्री योगी ने जब से देव दीपावली में नौका विहार किया है, तब से महापर्व का रुझान बढ़ा है। दीयों की भी मांग बढ़ गई है। सरकार के इलेक्ट्रिक सोलर चाक ने काम को आसान बना दिया है। 

बाती बनाने वालों को भी मिला रोजगार, हो रही अच्छी आय
बाती बनाने वाले शुभम त्रिपाठी ने बताया कि लाखों की संख्या में सरकार की ओर से बाती बनाने का ऑर्डर मिला है। कलावा (रक्षा सूत्र) के धागों से बाती बनाई जा रही है। घाट देर तक रोशन रहें, इसलिए बाती बड़ी बनाकर मोम लगाया गया है। इस काम में करीब 45 लोगों से अधिक की टीम लगी हुई है।
 
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