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तस्वीरों में खूबसूरती: 11 लाख दीपों से जगमगाए काशी के 84 गंगा घाट, ऐसा अद्भुत नजारा कहीं और नहीं

Wed, 13 Nov 2019 11:57 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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देव दीपावली पर मानसरोवर घाट कुछ इस तरह जगमग दिखा। - फोटो : अमर उजाला
देव दीपावली पर उत्सवों के समृद्ध मास कार्तिक की पूर्णिमा पर सदानीरा का दीप चंद्रहार निहारने के लिए देवलोक काशी पर उतर आया। भव्य से भव्यतम हो चुकी देव दीपावली पर जाह्नवी के 84 घाटों पर दीपों की दमक, झालरों की चमक और सुरों की खनक से अद्भुत आभा बिखरी।
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गीत संगीत के बीच गगनचुंबी आतिशबाजी और लेजर शो ने गंगा की लहरों पर इंद्रधनुष उकेर दिया। राजघाट से अस्सी तक देवताओं की अगवानी के लिए 11 लाख दीपक जलाए गए। अलौकिक नजारे ने मां गंगा के कदम चूमने सितारों के धरती पर उतर आने का आभास कराया। इनके बीच आरती की लौ लुभाती रही।
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कार्तिक मास की पूर्णिमा पर अद्भुत, अलौकिक और दिव्य देव दीपावली ने स्वर्णिम आभा बिखेरी। चौरासी घाट और छत्तीस पौराणिक कुंडों पर दीपों की सजावट हर नयन में बस गई। अस्ताचालगामी सूर्य के साथ ही गंगा के तट पर शंखनाद गूंजा। पंचनद तीर्थ पंचगंगा घाट के हजारा दीप स्तंभों पर उत्सव का श्रीगणेश करती दीप ज्योति टिमटिमाई। इसके साथ ही घंटा-घड़ियाल, डमरू की समवेत ध्वनि और घाटों से गंगा की लहरों तक बस दीप ही दीप नजर आए।

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खिड़किया से सामने घाट तक गंगा के पाट पर भी टिमटिम करते दीप छा गए। दिव्य नजारे ने गंगा के समानांतर ज्योति गंगा के हिलोरें लेने का अहसास कराया। गंगा के तट श्रद्धा और आस्था से भरी भीड़ से पटे रहे। दशाश्वमेध घाट पर शहीदों की याद में कार्तिक मास पर्यंत रोशन होने वाले आकाशदीप का भी समापन दीपदान के साथ किया गया।
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घाटों पर बिखरे लोक संस्कृति के रंग
प्रशासन की ओर से 16 घाटों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। रविदास घाट पर रामलीला, रीवा घाट पर बिरहा गायन, निषादराज घाट पर घूमर व चरी लोक नृत्य, चेत सिंह घाट पर भजन गायन, महानिर्वाणी घाट पर डांडिया, प्राचीन हनुमान घाट पर शहनाई वादन, चौकी घाट पर बांग्ला लोक नृत्य, राजघाट पर सूफी गायन, पांडेय घाट पर कथक नृत्य, दरभंगा घाट पर लोक गायन, सिंधिया घाट पर पंजाबी लोक नृत्य, रामघाट पर सितार व बांसुरी की युगलबंदी, लाल घाट पर भजन गायन, गाय घाट पर नाट्य मंचन, बद्रीनारायण घाट पर राजस्थानी लोक नृत्य और नंदेश्वर घाट पर लोक नृत्य का आयोजन किया गया।
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गंगा पार रेती में भी आस्था की खेती
गंगा पार की रेती में भी लोगों ने दीयों से रोशनी कर गंगा के दोनों ही किनारों को उजाले की आस्था अर्पित की। नाव और बजरों से गंगा पार पहुंचे लोगों ने मां गंगा को दीप अर्पित किए और रेत पर दीपों से आकृतियां उकेर कर रोशनी के पर्व को अनोखे ढंग से मनाया। घाटों की प्रतिकृति भी गंगा पार रेती पर दीयों के रूप में साकार हुई।
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आस्था से जुड़े घाट से घाट
देव दीपावली पर देवताओं को दीप प्रज्जवलित करने के लिए आस्थावानों का रेला ऐसा उमड़ा की घाटों पर मेला सज गया। गंगा में नावों का ट्रैफिक जाम भी हर किसी के लिए कौतूहल का विषय रहा। शाम सात बजने के बाद गंगा के घाटों पर तो तिल रखने की जगह नहीं बची थी। अस्सी, दशाश्वमेध, राजघाट, विशेश्वरगंज समेत सभी क्षेत्रों में भीड़ का दबाव देर रात तक बना रहा।

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शहीदों को किया नमन
वरुणापुल स्थित शास्त्री घाट पर शहीदों की स्मृति में दीपदान किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वरुणा की आरती उतारने के बाद किया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने मनोहारी प्रस्तुतियां की।

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जगमग हुए काशी के कुंड
33 कोटि देवताओं के स्वागत के लिए सजी संवरी काशी का कोई भी कोना दीयों की रोशनी से अछूता नहीं था। घर से लेकर घाट और कुंड भी दीपों की आभा से दमक उठे। लक्ष्मी कुंड, सूरज कुंड, मंदाकिनी कुंड, राम कटोरा कुंड, सारंगतालाब, कर्दमेश्वर सहित सभी कुंडों पर श्रद्धालुओं ने दीप अर्पित किए। शहर के सभी छोटे बड़े मंदिर भी दीयों की रोशनी से जगमग हो उठे।

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नहीं हुई महाआरती, निभाई गई रस्म
दशाश्वमेध घाट पर देव दीपावली की भव्यता नजर नहीं आई। सात आचार्यों द्वारा मां गंगा की आरती उतारकर रस्म अदायगी की गई। हर साल देव दीपावली पर दशाश्वमेध घाट पर होने वाली देव दीपावली को देखने की आस लेकर आने वाले पर्यटकों को निराश होना पड़ा।
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प्रशासन की ओर से गंगा की लहरों पर मंच की अनुमति नहीं मिलने के कारण गंगा सेवा निधि ने कार्यक्रम को निरस्त कर दिया और केवल आरती कराने का निर्णय लिया था। वहीं गंगोत्री सेवा समिति की ओर से 108 किलोग्राम अष्टधातु की मां गंगा की प्रतिमा का भव्य शृंगार किया गया।
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