वर्ष 1985 में तीन उत्सवों को मिलाकर मैंने देव दीपावली की शुरुआत काशी के पंचगंगा घाट पर की थी। दिन रविवार का था और एक दिन पहले त्रिपुरोत्सव (त्रिपुरारी पूर्णिमा) मनाया जा रहा था। उक्त बातें मंगलागौरी मंदिर के महंत पंडित नारायण गुरु ने खास बातचीत में कही।
उन्होंने बताया कि 40 वर्ष पहले इसका आयोजन पंचगंगा घाट किया गया था। यहां पांच नदियां (गंगा, यमुना, सरस्वती, किरण और धूतपापा) और पांच घाट (बालाघाट, केदारघाट, दुर्गा बिंदु माधव, गढ़वा और पुनिया) हैं। उस दिन ऊपर आकाशदीप और नीचे देवताओं के लिए दिए जल रहे थे। लगातार हो रहे इस आयोजन को देखते हुए 1995 में केंद्रीय देव दीपावली नामक एक संस्था भी बनाई गई।