फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Varanasi News: 650 किमी की दूरी में 14 बड़े स्टेशन फिर भी नाबालिगों को ले जाते हैं दलाल, एक साल में 27 मिले

Sun, 11 Jan 2026 04:04 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi Crime: रेलवे स्टेशनों पर जीआरपी और आरपीएफ लगातार निगरानी करती रहती है। बावजूद इसके दलाल नाबालिगों दूसरे राज्यों में ले जाने में सफल हो जाते हैं। एक साल में तस्करी के कुल 27 मामले आए हैं।
विज्ञापन
कैंट रेलवे स्टेशन। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Varanasi News: राष्ट्रीय मानव तस्करी जागरूकता दिवस पर सामने आए आंकड़े और हकीकत सिस्टम की बड़ी चूक की ओर इशारा करते हैं। दलाल सैकड़ों किलोमीटर तक नाबालिगों को ट्रेन से ले जाते रहे, लेकिन 650 किलोमीटर की लंबी दूरी में एक भी प्रभावी चेकिंग नहीं हुई। जबकि इसके बीच 14 बड़े स्टेशन पड़ते हैं और जीआरपी, आरपीएफ होती है। 

विज्ञापन


बावजूद नाबालिगों की तस्करी जारी है। ये तब सामने आया जब बनारस में बीते एक साल में मानव तस्करी के 26 नाबालिग को बरामद किया गया। उन्हें चाइल्ड लाइन फिर यहां से उनके घर के लिए भेजा गया। 

पुलिस और संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई में सामने आया है कि पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा बच्चों को बहला-फुसलाकर या गरीबी का फायदा उठाकर बाहर के राज्यों में दलाल काम दिलाने के नाम पर ले जाते हैं। इसके बदले उन्हें मोटी रकम मिलती है। ये जानकारी तब सामने आई जब जीआरपी ने छह दलालों को पकड़ा और पूछताछ की। बच्चों से बाल मजदूरी कराई जानी थी।

विज्ञापन

गुजरात, दिल्ली, हरियाणा में बाल मजदूरी ज्यादा
जांच में खुलासा हुआ है कि गुजरात, दिल्ली और हरियाणा जैसे औद्योगिक और शहरी राज्यों में बाल मजदूरों की सबसे अधिक मांग है। होटल, ढाबों, फैक्ट्रियों और घरेलू काम के लिए नाबालिगों को रखा जाता है। दलालों को प्रति बच्चे मोटी रकम मिलती है। सबसे बड़ा सवाल रेलवे और अंतरराज्यीय चेकिंग व्यवस्था पर है। लंबी दूरी की यात्रा में न तो संदिग्ध पर नजर रखी गई और न ही बच्चों के साथ सफर कर रहे दलालों से सख्ती से पूछताछ हुई। 

छह मानव तस्कर गिरफ्तार
आरपीएफ इंस्पेक्टर संदीप यादव ने बताया कि एक साल में कैंट और बनारस स्टेशन से मानव तस्करी से जुड़े छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जबकि 27 बच्चों को चाइल्ड लाइन को सौंपा गया। एएचटीयू थाना प्रभारी सत्यप्रकाश ने बताया कि कुछ अन्य संदिग्ध मिले, जिन्हें पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। पूछताछ में यह भी सामने आया कि तस्कर रेलवे स्टेशनों, गरीब इलाकों और दूरदराज के गांवों को अपना आसान निशाना बनाते हैं। बच्चों को बेहतर काम और कमाई का झांसा देकर घर से दूर ले जाया जाता है।
विज्ञापन

नौ अभियुक्तों को आजीवन कारावास 
वाराणसी में बच्चा चोरी कर झारखंड में बेचने के दो अलग-अलग मामलों में दो महिला समेत नौ लोगों को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुना चुकी है। दोनों मामलों में आरोपियों ने फुटपाथ व सड़क किनारे सोते समय बच्चों को उठाया था। हालांकि, बच्चों को वाराणसी पुलिस ने बरामद कर लिया। वहीं, आरोपियों को सजा हुई। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें