गुजरात, दिल्ली, हरियाणा में बाल मजदूरी ज्यादा
जांच में खुलासा हुआ है कि गुजरात, दिल्ली और हरियाणा जैसे औद्योगिक और शहरी राज्यों में बाल मजदूरों की सबसे अधिक मांग है। होटल, ढाबों, फैक्ट्रियों और घरेलू काम के लिए नाबालिगों को रखा जाता है। दलालों को प्रति बच्चे मोटी रकम मिलती है। सबसे बड़ा सवाल रेलवे और अंतरराज्यीय चेकिंग व्यवस्था पर है। लंबी दूरी की यात्रा में न तो संदिग्ध पर नजर रखी गई और न ही बच्चों के साथ सफर कर रहे दलालों से सख्ती से पूछताछ हुई।
छह मानव तस्कर गिरफ्तार
आरपीएफ इंस्पेक्टर संदीप यादव ने बताया कि एक साल में कैंट और बनारस स्टेशन से मानव तस्करी से जुड़े छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जबकि 27 बच्चों को चाइल्ड लाइन को सौंपा गया। एएचटीयू थाना प्रभारी सत्यप्रकाश ने बताया कि कुछ अन्य संदिग्ध मिले, जिन्हें पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। पूछताछ में यह भी सामने आया कि तस्कर रेलवे स्टेशनों, गरीब इलाकों और दूरदराज के गांवों को अपना आसान निशाना बनाते हैं। बच्चों को बेहतर काम और कमाई का झांसा देकर घर से दूर ले जाया जाता है।
नौ अभियुक्तों को आजीवन कारावास
वाराणसी में बच्चा चोरी कर झारखंड में बेचने के दो अलग-अलग मामलों में दो महिला समेत नौ लोगों को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुना चुकी है। दोनों मामलों में आरोपियों ने फुटपाथ व सड़क किनारे सोते समय बच्चों को उठाया था। हालांकि, बच्चों को वाराणसी पुलिस ने बरामद कर लिया। वहीं, आरोपियों को सजा हुई।