देश-दुनिया के बाजार में जल्दी ही काशी के शिल्प के नए रंग नजर आएंगे। नए दौर की जरूरतों, पसंद और फैशन के बदलते ट्रेंड के अनुरूप उत्पाद तैयार करने के लिए स्थानीय शिल्पियों, बुनकरों को अंतरराष्ट्रीय डिजाइनर प्रशिक्षित करेंगे। बुनकरों और शिल्पियों को समय-समय पर प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन भी मिलेगा।
यूपीआईडी (उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन) की ओर से शुक्रवार को दीनदयाल हस्तकला संकुल में शुरू हुए दो दिवसीय डिजाइन कॉन्क्लेव और हस्तशिल्पी-बुनकर समिट में उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित, केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री अजय टमटा और प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सत्यदेव पचौरी की मौजूदगी में यह जानकारी दी गई।
साथ ही, बुनकरों, शिल्पियों की कारोबारी सुविधा के लिए यूपीआईडी का एप लांच किया गया। डाक्यूमेंट्री और स्मारिका के विमोचन के अलावा पहले दिन शिल्पियों, बुनकरों को उनके उत्पादों के निर्माण में डिजाइन के महत्व की जानकारी दी गई।
यूपीआईडी की निदेशक क्षिप्रा शुक्ला ने बताया कि हमारा उद्देश्य बुनकरी की दोनों विधाओं में पारंगत करना है। मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने के साथ ही अपने उत्पाद के हिसाब से बाजार में मांग पैदा करने की दोहरी रणनीति पर काम किया जा रहा है।
यूपीआईडी एप ऐसा मंच है, जहां शिल्पी, डिजाइनर, बुनकर, खरीदार आदि सभी शामिल होंगे। से गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। यूपीआईडी से जुड़े राज्यसभा सांसद विनय सहस्त्रबुद्धे के अलावा निदेशक यूपीआईडी पवन कुमार, संयुक्त निदेशक उद्योग उमेश सिंह, डॉ. रजनीकांत, उद्यमी अशोक गुप्ता, देव भट्टाचार्या आदि इस मौके पर मौजूद रहे।