उप महंत शंकर पुरी के सिर बंधी महंत की पगड़ी
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श्री अन्नपूर्णा ऋषिकुल ब्रह्मचर्य आश्रम में रह कर अध्ययन करने शंकर पुरी साल 1988 से काशी में ही रह रहे हैं वह मध्यप्रदेश के रहने वाले है। इन्होंने ऋषिकुल से पूर्व मध्यमा, उत्तर मध्यमा और शास्त्री की पढ़ाई की। फिर विद्यापीठ से डबल एमए किया। विगत 17 वर्षों से मां भगवती की सेवा में खुद को समर्पित करके श्रीअन्नपूर्णा मठ-मंदिर की सेवा में जुटे हैं।
गौरतलब है कि श्री अन्नपूर्णा मठ मंदिर के पूर्व महंत रामेश्वर पुरी लंबी बीमारी के बाद बीती 16 जुलाई को ब्रह्मलीन हुए थे। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक जताया था। 13 जुलाई को सीएम योगी ने श्री अन्नपूर्णा मठ मंदिर भी गए थे। महंत रामेश्वर पुरी को अन्नपूर्णा मठ मंदिर के महंत की गद्दी 17 अक्टूबर 2004 को सौंपी गई थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक शोक संदेश मंदिर प्रशासन को मिला है। मंदिर के नए महंत शंकर पुरी के नाम लिखे गए इस पत्र में प्रधानमंत्री ने अपनी शोक संवेदनाएं व्यक्त की है। उन्होंने लिखा है कि महंत रामेश्वरपुरी जी के देहावसान के बारे में जानकार अत्यंत दुःख हुआ। इस मुश्किल समय में मेरी संवेदनाएं शुभचिंतकों के साथ है। आगे लिखा कि महंत रामेश्वरपुरी का जीवन धर्म और आध्यत्म को समर्पित था।
उनके कुशल नेतृत्व में काशी अन्नपूर्णा अन्नक्षेत्र ट्रस्ट द्वारा लोक कल्याण के लिए अनवरत प्रयास किए गए। उन्होंने सदैव लोगों को सामाजिक कार्यों के लिए प्रेरित किया। उनका निधन समाज के लिए अपूरणीय क्षति हैं। प्रधानमंत्री ने ईश्वर से प्रार्थना करते हुए लिखा है कि ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दे और इस कठिन घड़ी में शोक संतप्त शुभचिंतकों को दुःख सहन करने का धैर्य और संबल प्रदान करे।