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कोरोना पर ही ध्यान, डेंगू की परवाह ही नहीं

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वाराणसी। जून बीता, जुलाई भी बीत गया और अगस्त भी खत्म होने वाला है, लेकिन अबतक बारिश में मच्छर जनित रोगों से बचाने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। इसके लिए जिम्मेदार कोरोना की आढ़ लेकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
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दरअसल, लगभग तीन माह से हो रही बारिश के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। जिससे मच्छर जनित रोग डेंगू, मलेरिया आदि का खतरा बढ़ गया है। लेकिन इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग की तैयारी अभी शुरू भी नहीं हुई है। आलम यह है कि अब तक न तो अलग वार्ड बन सका है, न ही बेड रिजर्व किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के साथ ही नगर निगम भी लापरवाही बरतने में पीछे नहीं। निगम ने तो अब तक बारिश से जलभराव वाले इलाकों में न तो फॉगिंग कराई है। चेकिंग अभियान शुरू किया है। यदि ऐसा ही रहा तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
गौरतलब है कि जुलाई से नवंबर तक डेंगू-मलेरिया होने की संभावना अधिक रहती है। पिछले साल जून के अंतिम सप्ताह तक सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में अलग वार्ड बनने, बेड रिजर्व सहित अन्य तैयारी हो गई थी।
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डेंगू-मलेरिया के लक्षण
-तेज बुखार, सिरदर्द होना।
-मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द।
-शरीर पर चकत्ते पड़ना
-कमजोरी महसूस होना।
आप भी बरतें सावधानी
-पानी से भरे बर्तनों, टंकी को ढककर रखें।
-सप्ताह में एक बार कूलर की सफाई करें।
-बुखार आए तो बिना डाक्टर की सलाह दवा न लें।
-पूरी बांह का कपड़ा जरूर पहने।
कोरोना के साथ साथ डेंगू-मलेरिया नियंत्रण अभियान की तैयारी भी चल रही है। इसके लिए जिला मलेरिया अधिकारी को निर्देशित किया गया है। जल्द ही अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों पर सभी आवश्यक कार्रवाई भी पूरी कर ली जाएगी।-डॉ. वीबी सिंह,सीएमओ।
कोरोना के जुड़ी जानकारी दे रहे मलेरिया-फाइलेरिया इंस्पेक्टर
सिगरा कोविड कमांड कंट्रोल सेंटर पर रात में आने वाले फोन को अटेंड करने के लिए मलेरिया, फाइलेरिया इंस्पेक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। अलग-अलग दिन में 7 लोग रात 12 बजे से सुबह 9 बजे तक आने वाले कॉल में लोगों द्वारा कोरोना के बारे में पूछी जाने वाली जानकारी देने में लगे हैं।
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