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रुपहले पर्दे पर कोरोना की मार, सिनेमा मालिक हुए बेहाल

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वाराणसी। कोरोना काल में सबसे अधिक नुकसान हुआ तो वह सिनेमा हाल से जुड़े कारोबारी व कर्मचारियों का। 5 माह माह से सिनेमाघरों में सिल्वर स्क्रीन पर कोई फिल्म नहीं उतरी। ऑडी में सन्नाटा पसरा हुआ है। एक सिनेमा घर से जुड़े 20 से 25 लोगों की जीविका पर संकट आ गया है। मालिक किसी तरह कर्मचारियों को वेतन दे रहे हैं। वाराणसी में संचालित आधा दर्जन सिनेमा घर बंद है।
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सिगरा स्थित आईपी मॉल, छावनी स्थित जेएचवी, लक्सा का पीडीआर, भेलूपुर में आईपी विजया सहित अन्य 22 मार्च से बंद चल रहे हैं। कुछ कर्मचारियों ने दूसरा काम शुरू कर दिया तो कुछ इस आस में है कि जल्द ही सिनेमा घरों को खोलने की सरकार अनुमति देगी। मॉल में संचालित सिनेमा बंद होने से अब मॉल में भी भीड़ नहीं उमड़ती है। रेस्टोरेंट, कपड़े शो रूम, मोबाइल शो रूम आदि दुकानों में दस-दस दिन बोहनी तक नहीं हो रही है।
मॉल प्रबंधकों के अनुसार खर्च नहीं निकलने के कारण अब दुकानें बंद होने लगी है। लोग अपनी दुकान छोड़कर जाने लगे हैं। बिजली बिल, दुकानों का किराया, स्टाफ की सैलरी अन्य खर्चे इतने है कि उतनी कमाई अब नहीं हो रही है। लिहाजा, दुकानों को बंद करने के अलावा अन्य कोई चारा भी नहीं रह गया है। सिनेमा चलने के कारण मॉल के अंदर व बाहर खानपान की दुकानों पर ठीक ठाक भीड़ उमड़ती थी। कैंटीन, फास्टफूड की दुकानें मॉल के अंदर चलती थी, जहां शो के समय कर्मचारियों को फुर्सत नहीं मिलती थी। अब इस कोरोना काल में सब ठप है। कैंटीन बन्द होने से कर्मचारियों की जीविका बंद हो गई। इधर, टिकट काउंटर के कर्मचारियों, सुरक्षा गार्ड, सफाई कर्मी और पर्किंग चलाने वालों सबकी जीविका संकट में है।
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एक मॉल में एक बार में 900 लोग देखते थे सिनेमा
अब आईपी के सिगरा को ही ले लीजिए। कोरोना से पहले एक बार में तीन ऑडी चलती थी, जिसमें 900 लोग सिनेमा देखते थे। अन्य मॉल के सिनेमा हाल में भी इतनी ही भीड़ होती थी। अब एक आदमी तक नहीं जाता। मॉल में थियेटर कब शुरू होगा, यह भी जानकारी नहीं है। सिनेमा चलने के कारण ऑटो व रिक्शा वालों सहित कैब वालों की ठीक ठाक इनकम हो जाती थी।
सिनेमा बन्द होने से मॉल पर काफी असर पड़ा है। कर्मचारियों की जीविका ठप हो गई तो कितनों ने दूसरा काम धाम भी शुरू कर दिया। सिनेमा नहीं शुरू होने से अन्य दुकानों पर भी काफी असर पड़ा है। बहुत ही संकट की घड़ी है। --शीतला शरण सिंह, मॉल मैनेजर, सिगरा
बिजनेस खत्म हो गया। यह उम्मीद जगी रहती है कि इस माह सिनेमा संचालन को अनुमति मिलेगी। कइयों ने नौकरी छोड़ दी, कुछ अब भी उम्मीद में है। बिजली, पानी सभी का टैक्स दिया जा रहा लेकिन बिजनेस जीरो है। --कृष्णा पांडेय, मॉल प्रबन्धक, भेलूपुर
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