शहर के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग संगठनों और समूहों ने अपने हक की आवाज उठाई और धरना-प्रदर्शन भी किया। आईआईटी बीएचयू के छात्रों ने संसाधनों में बढ़ोतरी के लिए निदेशक का कार्यालय घेरा तो बीएचयू सिंहद्वार पर भी छात्रों-कर्मचारियों के लिए मैगसायसाय पुरस्कार विजेता संदीप पांडेय ने सभा कर विरोध जताया। गांधी विद्या संस्थान संघर्ष समिति की ओर से संस्थान से कब्जा हटाने के लिए धरना दिया गया। वहीं, वेतन विसंगति के विरोध में फर्मासिस्टों ने काली पट्टी बांधकर काम किया।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बीएचयू के छात्र-छात्राओं ने संस्थान में फीस वृद्धि के अनुरूप सुविधाएं न बढ़ाए जाने के विरोध में शनिवार को निदेशक कार्यालय का घेराव कर दिया। नारेबाजी कर छात्र सुविधाओं के लिए आवाज उठाई। हॉस्टल से लेकर फैकल्टी की कमी के मुद्दे को खुलकर प्रशासन के समक्ष रखा। इसके पहले लिंबडी चौराहे से संस्थान के करीब दो सौ छात्र-छात्राओं ने जुलूस निकाला। हाथों में अपनी मांगों के संबंध में उन्होंने पोस्टर ले रखे थे। शांति के साथ जुलूस निकालते हुए सभी छात्र निदेशक कार्यालय पहुंचे। छात्र-छात्राओं का कहना था कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा इस साल आईआईटी में तीन गुना फीस बढ़ाई गई। फीस में बढ़ोतरी ये कहकर की गई कि इससे छात्र सुविधाओं को और सुदृढ़ किया जाएगा। आईआईटी बीएचयू में सबसे ज्यादा कमी शिक्षकों की है। हॉस्टलों की भी कमी है। इसके अलावा लाइब्रेरी में भी किताबों का टोटा है। उन्होंने 24 घंटे लाइब्रेरी खोले जाने की भी मांग की है। छात्रों का कहना था कि लैब में उपकरण भी मानक के अनुरूप नहीं हैं। इस दौरान छात्राओं ने वीमेन सेल की भी मांग रखी। प्रो. जीवीएस शास्त्री, प्रो. एके मुखर्जी व डॉ. प्रभाकर सिंह ने उन्हें आश्वासन दिया कि छात्र संसद के आपातकालीन सत्र में इन सभी मुद्दों पर चर्चा होगी और उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। तब छात्रों ने धरना समाप्त किया।
वहीं, गांधी विद्या संस्थान से अवैध कब्जा हटाने के लिए गांधी विद्या संस्थान संघर्ष समिति की ओर से शनिवार को शास्त्री घाट पर धरना दिया गया। सामाजिक कार्यकर्ता, गांधीवादी और समाजवादी चिंतक धरने में शामिल हुए। धरने के बाद जुलूस के रूप में वे जिला मुख्यालय पहुंचे, वहां डीएम कार्यालय को सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। मैग्सायसाय एवार्डी संदीप पांडेय ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण द्वारा स्थापित संस्थान दुर्दशा का शिकार है। इसमें गांधी विरोधी लोग रह रहे हैं। डीएम से मांग की गई कि संस्थान का मुख्य प्रवेश द्वार खोला जाए। लोकनायक की प्रतिमा मुख्य भवन के ग्रंथागार के सामने पूर्ववत स्थापित की जाए। धरने में मोहम्मद आरिफ, मुनीजा रफीक खान, डॉ. आनंद तिवारी, अफलातून, डॉ. नीता चौबे, फादर दिलराज, जागृति राही शामिल थे।