लोकबंधु राजनारायण की 104वीं जयंती पर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ सेंट्रल लाइब्रेरी समिति कक्ष में उन्हें भारत रत्न देने की मांग की गई। संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि नरेंद्र त्यागी ने प्रस्ताव रखा। जिसका समारोह में मौजूद लोगों ने सर्वसम्मति से समर्थन किया। मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि राजनारायण को युवा राजनीति को दिशा देने में महारत हासिल था। वह राजनीति को सेवा का माध्यम मानते थे। मुख्य वक्ता भासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरुण कुमार ने कहा कि संघर्ष और राजनारायण एक दूसरे के पूरक थे। वह समाजवादी चिंतक और संघर्ष के पर्याय थे। विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय ब्रह्मर्षि महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व सांसद महाबल मिश्र ने लोक बंधु को राजनीतिक गुरु बताया। इस मौके पर अनिरुद्ध नारायण सिंह, कुंवर सुरेश सिंह, प्रदीप कुमार, एके लारी, ब्रजेश कुमार शर्मा, विजय कृष्ण, जावेद अख्तर, अभय श्रीवास्तव, यशोवर्धन सिंह, डाक्टर दिलीप कुमार गौतम, सीपी राय और रमेश यादव को सम्मानित किया गया। अध्यक्षता धीरेंद्र नाथ श्रीवास्तव, संचालन रविभान सिंह ने किया।
...और विक्टोरिया की मूर्ति को गिरा दिया
समाजवादी सुरेश सिंह ने बताया कि लोक बंधु अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ थे। उन्होंने पुलिस सुरक्षा के बावजूद बेनिया बाग में अंग्रेजों की महारानी विक्टोरिया की मूर्ति को तोड़ दिया। उन्होंने विक्टोरिया की मूर्ति को गुलामी की निशानी बताते हुए विरोध किया और तगड़े पुलिस बंदोबस्त के बाद भी चकमा देते इसे अंजाम दिया। इसके बाद दर्जनों लोगों की गिरफ्तारी हुई।