उदय प्रताप शिक्षा समिति का पंजीकरण निरस्त होने के बाद अब प्रबंधन के हाथ में इसकी कमान होगी। इस मामले में शासन और विश्वविद्यालय से जल्द से जल्द प्रबंधन व्यवस्था को लागू करने की मांग की गई है।
प्राचीन छात्र एसोसिएशन के उपाध्यक्ष आनंद विजय व डॉ. वशिष्ठ सिंह ने बताया कि 57 साल पुरानी सोसायटी का अंतिम नवीनीकरण 2015 में हुआ था। इसकी शिकायत चंदमणिकांत सिंह ने 2017 में की थी। उन्होंने सहायक निबंधक फर्म सोसायटी चिटफंड में शिकायत करते हुए कहा था कि संस्था संस्थापक के उद्देश्यों के विपरीत काम कर रही है और संस्था ने नवीनीकरण भी नहीं कराया था। कई बार की सुनवाई के बाद सोसायटी के पंजीकरण को निरस्त कर दिया गया है। सोसायटी भंग होने के बाद कॉलेज की कमान अब उदय प्रताप हीवेट क्षत्रिया स्कूल एंड एंडाउमेंट ट्रस्ट के हाथों में आ जाएगी। शासन को पत्र लिखकर जल्द से जल्द कॉलेज को प्रबंधन के हाथों में देने का अनुरोध किया गया है।
चिट्स एंड फंड के सहायक निबंधक की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि उदय प्रताप एजुकेशन सोसायटी अपने बाइलाज में कपटपूर्ण तरीके से राज्यपाल को सोसायटी का विजिटर, जिलाधिकारी, कमिश्नर को पदेन सदस्य बताते थे। राज्यपाल ने 10 जून 2013 को समिति के सचिव को इस बाबत कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। समिति की वैधता को लेकर प्राचीन छात्र एसोसिएशन के उपाध्यक्ष आनंद विजय व महाविद्यालय के पूर्व प्रवक्ता डॉ. वशिष्ठ सिंह 2012 से लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ से भी इसकी शिकायत की थी और सीएम के आदेश पर जांच समिति का गठन किया गया था। प्राचीन छात्र एसोसिएशन के उपाध्यक्ष आनंद विजय ने इसकी सूचना वाराणसी आयुक्त, शिक्षा निदेशक, कुलसचिव और उदय प्रताप कालेज हीवेट क्षत्रिया स्कूल एंडाउमेंट ट्रस्ट द्वारा चल रहे कालेज के अंदर सभी संस्थाओ के प्रमुख को दे दी है।
समिति का पत्र उन्हें प्राप्त हुआ है। कॉलेज की सभी वित्तीय गतिविधियां रोक दी गई हैं। सारे तथ्यों का अध्ययन किया जा रहा है जो भी शासनादेश होगा उसके अनुसार निर्णय लिया जाएगा।- डॉ. जीएस राठौर, प्राचार्य यूपी कॉलेज