दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि जब देश में भूख, बेरोजगारी और असंतोष अपने चरम पर था, तब सिर्फ सत्ता की लालसा में 25 जून 1975 की रात इंदिरा गांधी ने रेडियो पर आपातकाल लागू करने की घोषणा कर दी। यह निर्णय लोकतंत्र को कुचलने वाला, संविधान को अनदेखा करने वाला और नागरिक अधिकारों का गला घोंटने वाला था। लोगों को 21 महीने तक यातनाएं सहनी पड़ीं। सरकार ने निर्ममता और कठोरता की सारी हदें पार कर दी थीं। ये बातें उन्होंने कमिश्नरी सभागार में रविवार को आयोजित मॉक पार्लियामेंट में बतौर मुख्य अतिथि कहीं।
उन्होंने कहा कि भारत में कांग्रेस ने संविधान का गला घोटा और आज राहुल गांधी उसी संविधान की दुहाई देते हैं। कांग्रेस ने जब और जैसे चाहा संविधान में बदलाव किया और वे सभी लोग जो देशहित में बात करते थे, उन्हें जेल में डलवा दिया गया। इंदिरा गांधी ने देश को व्यक्ति-पूजा और परिवारवाद की प्रयोगशाला बना दिया था। भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय है आपातकाल।