समय पर इलाज न हो पाने से शुक्रवार की रात बच्चे को जन्म देने के बाद एक प्रसूता की मौत हो गई। बिहार की रहने वाली हीरा देवी (25) को प्रसव के लिए उसके परिवार के लोग यहां मंडलीय अस्पताल ले आए थे। यहां से उसे तत्काल महिला अस्पताल रेफर किया गया लेकिन वहां भर्ती कर इलाज करने के बजाय उसे लौटा दिया गया था। परिवारवालों ने महिला अस्पताल की चिकित्सकों, नर्सों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। साथ ही, नवजात को लेकर घर लौट गए।
कैमूर, बिहार के कोदसरा निवासी विनोद की पत्नी हीरा देवी (25) को प्रसव के लिए शुक्रवार की रात नौ बजे मंडलीय अस्पताल ले आया गया था। जानकारी न होने से परिवार के लोग उसे मंडलीय अस्पताल से सटा स्थित महिला अस्पताल ले जाने के बजाय मंडलीय अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंच गए। यहां इमरजेंसी में तैनात चिकित्सकों ने हीरा देवी को तत्काल महिला अस्पताल भेजा। पति विनोद ने बताया कि जब वह हीरा को लेकर महिला अस्पताल पहुंचे तो वहां तैनात नर्सों ने भर्ती करने से इनकार करते हुए वापस भेज दिया।
वे हीरा को फिर मंडलीय अस्पताल ले आए। यहां हीरा ने बच्चे को जन्म दिया। इसकी जानकारी पर रात 12 बजे चिकित्सक डॉ. ओमप्रकाश ने प्रसूता को महिला अस्पताल भिजवाया, जहां डॉक्टरों ने प्रसूता की हालत नाजुक बताते हुए उसे बीएचयू रेफर कर दिया। बीएचयू ले जाते समय पत्नी ने दम तोड़ दिया। विनोद का कहना था कि समय रहते अगर हीरा देवी को महिला अस्पताल में भर्ती कर लिया जाता तो उसकी जान बच सकती थी। उधर, महिला अस्पताल प्रशासन का कहना था कि खून की कमी की वजह से महिला को बीएचयू जाने की सलाह दी गई थी।