Varanasi News: आईआईटी बीएचयू केकंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में रक्षा तकनीक पर शोध कार्य चल रहा है। इस शोध कार्य को शिक्षामंत्री, रक्षा राज्यमंत्री ने भी सराहा।
आईआईटी बीएचयू के रक्षा अनुसंधान को तीनों सेनाओं का समर्थन मिला है। यहां कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में चल रहे शोध के लिए भारतीय सशस्त्र बलों की तीनों सेनाओं से प्रशंसा और वित्तीय सहयोग प्रदान किया गया है। यहां हो रहे शोध कार्य की सराहना केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने की है।
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आईआईटी बीएचयू के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. अजय प्रताप और आईआईआईटी गुवाहाटी के डॉ. राकेश मातम राष्ट्र की सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में सहायक होने वाले रक्षा तकनीकों पर शोध कर रहे हैं। इसे नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में आयोजित ट्राई सर्विसेज एकेडेमिया टेक्नोलॉजी संगोष्ठी के समापन सत्र में मान्यता दी गई है। इस दौरान थल सेनाध्यक्ष उपेंद्र द्विवेदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी कामत सहित कई संस्थानों के शोधकर्ता भी मौजूद रहे।
आईआईटी की इस सफलता पर शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ऐसे अकादमिक–रक्षा सहयोग भारत की तकनीकी श्रेष्ठता और आत्मनिर्भरता की नींव को मजबूत कर रहे हैं। आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि यह उपलब्धि आईआईटी की उस मूल भावना को दर्शाती है, जहां ज्ञान, नवाचार और राष्ट्र-सेवा का संगम होता है।
हमारे संकाय के शोध को सशस्त्र बलों की तीनों शाखाओं से मान्यता मिलना न केवल संस्थान के लिए गर्व की बात है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण भी है कि भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाने में अकादमिक संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण है। एआई-संचालित और भविष्य-उन्मुख रक्षा तकनीकों के विकास में भारतीय सेना के साथ हमारा सहयोग इस बात का सशक्त उदाहरण है कि शोध किस प्रकार सीधे राष्ट्र की सुरक्षा सीमाओं को मजबूत कर सकता है।